यमन में एक बार फिर से गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी (IRC) की हेल्थ कोर्डिनेटर समिहा अवद बताहेर ने अल जज़ीरा (Al Jazeera) पर एक रिपोर्ट साझा की है। 14 मार्च 2026 को जारी इस आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में भुखमरी का खतरा बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। देश की आधी से ज़्यादा आबादी यानी करीब 1.8 करोड़ लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान भटकने के कारण यमन के लोग खामोशी से भूखे मरने को मजबूर हैं।

यमन में भुखमरी का क्या है मौजूदा हाल?

यमन के हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, करीब 10 लाख लोग जानलेवा भुखमरी की ओर बढ़ रहे हैं। अगले दो महीनों में अब्ब्स, कुशर, अज़ ज़ुहराह और अल अश्शाह जैसे जिलों में 40,000 से अधिक लोगों के सामने अकाल (IPC Phase 5) की स्थिति पैदा होने की आशंका है। लोग अपना गुजारा करने के लिए घर के ज़रूरी सामान जैसे गहने, औज़ार, दरवाज़े और रसोई गैस सिलेंडर तक बेच रहे हैं।

राहत और खाने पीने के सामान की कमी क्यों हो रही है?

फंडिंग की भारी कमी के कारण World Food Programme (WFP) ने अपने सहायता कार्यक्रम में बड़ी कटौती की है।

  • IRG वाले इलाकों में सहायता पाने वालों की संख्या 34 लाख से घटाकर 17 लाख कर दी गई है।
  • सना (SBA) के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में खाने पीने की सहायता पर फिलहाल रोक लगी हुई है।
  • साल 2025 के अंत तक राहत कार्यों के लिए ज़रूरी फंड का सिर्फ 25 प्रतिशत ही मिल पाया था।
  • जीवन रक्षक पोषण सहायता के लिए सिर्फ 10 प्रतिशत फंड ही उपलब्ध है।

यूएन एजेंसियों और IRC ने बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए तुरंत रेडी-टू-यूज़ खाने की सप्लाई बहाल करने की मांग की है।

महंगाई और अंतरराष्ट्रीय युद्ध का क्या पड़ा असर?

यमन अपने खाने पीने के अनाज का 80 से 90 प्रतिशत आयात (Import) करता है। सना में खाने के तेल के दाम में 6 प्रतिशत और गेहूं के आटे में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा नए टैक्स लगने से बाज़ार में महंगाई और बढ़ गई है। हालांकि अदन (Aden) शहर में सऊदी अरब की आर्थिक मदद के कारण विनिमय दर 1,616 यमनी रियाल प्रति डॉलर पर स्थिर है। अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच चल रहे अंतरराष्ट्रीय विवाद के कारण पूरी दुनिया का ध्यान यमन संकट से हट गया है जिससे यहां के लोगों तक मदद पहुंचने में देरी हो रही है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.