यमन की शूरा काउंसिल ने दक्षिणी ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) को भंग करने की घोषणा का पुरजोर स्वागत किया है। परिषद ने इस कदम को यमन के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना है, जिससे देश में स्थिरता और एकता के प्रयासों को बल मिलेगा। शूरा काउंसिल का मानना है कि यह निर्णय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया एक आवश्यक कदम है।
एकतरफा परियोजनाओं या बल प्रयोग के जरिए थोपे गए ढांचे से कभी नहीं निकल सकता दक्षिणी मुद्दे का कोई स्थायी समाधान
काउंसिल ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि दक्षिणी मुद्दे का समाधान एकतरफा परियोजनाओं या जबरदस्ती थोपे गए किसी भी ढांचे के माध्यम से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। ऐतिहासिक अनुभव बताते हैं कि बलपूर्वक लागू किए गए निर्णय लंबे समय तक नहीं टिकते। इसलिए, किसी भी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक ढांचे को थोपने के बजाय आपसी समझ और सहमति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि देश में दीर्घकालिक शांति स्थापित हो सके।
नागरिकों की इच्छा का सम्मान और मोर्चे की एकता को बनाए रखने वाला समावेशी राजनीतिक रास्ता ही एकमात्र विकल्प
शूरा काउंसिल के अनुसार, वर्तमान संकट का वास्तविक समाधान एक समावेशी राजनीतिक रास्ते के माध्यम से ही संभव है। यह रास्ता ऐसा होना चाहिए जो यमन के नागरिकों की इच्छा का पूर्ण सम्मान करता हो और राष्ट्रीय मोर्चे की एकता को सुरक्षित रखता हो। राजनीतिक प्रक्रिया में सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करना और एक साझा जमीन तलाशना ही वह तरीका है जिससे देश को विखंडन से बचाया जा सकता है और एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।
संवाद के प्रयासों को प्रायोजित करने और संघर्ष विराम के लिए सऊदी अरब की जिम्मेदार और भाईचारापूर्ण भूमिका की सराहना
इस मौके पर शूरा काउंसिल ने सऊदी अरब द्वारा निभाई गई जिम्मेदार और भाईचारापूर्ण भूमिका की विशेष रूप से सराहना की है। काउंसिल ने कहा कि सऊदी अरब ने संवाद के प्रयासों को प्रायोजित करने और तनाव कम करने (डी-एस्केलेशन) के रास्तों का समर्थन करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संघर्षों को समाप्त करने वाले व्यापक राजनीतिक समाधान खोजने के प्रति सऊदी अरब की प्रतिबद्धता यमन में शांति बहाली के प्रयासों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।




