यमन में केरल की नर्स की फांसी की सजा को रोकने के लिए भारत में तेज हुईं कोशिशें
16 जुलाई को केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में फंसी की सजा देने का ऐलान किया गया है। जैसे-जैसे फांसी की सजा की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे भारत भर में अपीलों की एक तेज़ लहर उठ रही है। राजनीतिक नेताओं से लेकर सामाजिक संगठनों तक — सभी केंद्र सरकार से तत्क्षण और निर्णायक हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, ताकि निमिषा प्रिया की जान बचाई जा सके।
गुरुवार को केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इस मामले में उच्च स्तरीय राजनयिक प्रयासों की अपील की। भारतीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने लिखा, “मैं आपसे निवेदन करता हूं कि 37 वर्षीय भारतीय नर्स निमिषा प्रिया, जो पलक्कड़ की रहने वाली हैं और जिनकी फांसी निकट है — उनके मामले में आप मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करें। यह एक गंभीर मानवीय संकट है।”
सैमुअल जेरोम भास्करन, जो यमन में स्थित एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और निमिषा की मां द्वारा पीड़ित परिवार से बातचीत के लिए अधिकृत किए गए हैं, उन्होंने पुष्टि की है कि ब्लड मनी (दियात) के माध्यम से माफी दिलाने की कोशिशें ज़ोर पकड़ रही हैं।
भास्करन ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा, “इकलौता विकल्प यही है कि हम यमन के प्रभावशाली स्थानीय नेताओं को शामिल करें, जो मृतक के परिवार को माफीनामा स्वीकार करने के लिए मना सकें।”
भास्करन ने भारत सरकार की भूमिका को सराहा
यमन में फंसी भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी को अब तक टालने में भारत सरकार की भूमिका अहम रही है। यमन में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम भास्करन ने कहा कि यदि पहले भारत सरकार ने हस्तक्षेप न किया होता, तो “उन्हें बहुत पहले ही फांसी दी जा चुकी होती।” उन्होंने विशेष रूप से पूर्व विदेश राज्य मंत्री जनरल वी.के. सिंह द्वारा लिखे गए एक पत्र का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने महत्वपूर्ण मोड़ बताया। भास्करन ने कहा, “भारत सरकार के पूर्व प्रयासों — खासकर जनरल वी.के. सिंह द्वारा भेजे गए पत्र की वजह से ही अब तक फांसी को टालना संभव हुआ है।”
भारत सरकार ही आखिरी उम्मीद
CPI(M) के सांसद के. राधाकृष्णन और जॉन ब्रिटास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर इस मामले में त्वरित और निर्णायक कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है। सांसद जॉन ब्रिटास ने अपने पत्र में ज़ोर देकर कहा कि Save Nimisha Priya Action Council, जो एक नागरिक अभियान है, ब्लड मनी (दियात) की पूरी राशि देने को तैयार है, यदि मृतक के परिवार के साथ समझौता संभव हो सके।
के. राधाकृष्णन ने पत्र में लिखा “निमिषा की मां और परिवार असहनीय मानसिक यातना से गुजर रहे हैं। उनकी एकमात्र उम्मीद अब भारत सरकार के समय पर उठाए गए कदमों पर टिकी है।”
निमिषा प्रिया को बचाने की अपील में राज्यस्तरीय समर्थन भी हुआ तेज़
भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में फांसी से बचाने के लिए अब राज्यस्तर पर भी भावनात्मक और राजनीतिक समर्थन तेज़ हो गया है। बुधवार को पूर्व केरल मुख्यमंत्री ओमन चांडी की पत्नी मरियम्मा ओमन चांडी ने अपने बेटे विधायक चांडी ओमन के साथ केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात की और इस मामले में राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका की मांग की।
मरियम्मा ने अपने दिवंगत पति की इस मामले में प्रारंभिक भूमिका को याद करते हुए कहा “मैं उनके अधूरे मिशन को पूरा करना चाहती हूं — निमिषा को बचाना।” उन्होंने राज्यपाल से अपील की कि वे केंद्र सरकार तक यह संदेश पहुंचाएं कि अब समय हाथ से निकलता जा रहा है।
इस बीच, भारत के सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई निर्धारित है। याचिका में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि वह यमन के साथ सभी कूटनीतिक चैनल सक्रिय करे, और निमिषा प्रिया की फांसी पर रोक लगवाने के लिए हस्तक्षेप करे।
यमन का कानून क्या कहता है?
यमन की न्याय प्रणाली के तहत:
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यदि मृतक के परिवार को ‘ब्लड मनी’ (दियात) दी जाए और वे माफीनामा दें, तो मृत्युदंड को माफ किया जा सकता है।
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लेकिन यह प्रक्रिया स्थानीय प्रभावशाली नेताओं और मध्यस्थों के माध्यम से ही आगे बढ़ सकती है, क्योंकि भारत के पास यमन में प्रत्यक्ष दूतावास या औपचारिक राजनयिक पहुंच नहीं है।





