अमेरिका का बड़ा बयान: खाड़ी देशों में तनाव के बीच भारत बना अहम साझेदार, कच्चे तेल की कीमत पहुंची 98 डॉलर के पार
खाड़ी देशों में बढ़ रहे तनाव और Strait of Hormuz में हो रहे लगातार हमलों के बीच अमेरिका ने एक बड़ा बयान दिया है। भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा है कि दुनिया में तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए भारत एक बेहद अहम साझेदार है। ईरान की तरफ से कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके साथ ही खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीयों और वहां काम कर रहे नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी हालात गंभीर हो गए हैं।
ईरान के हमलों का तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?
ईरान लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी राजदूत ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ईरान का रवैया पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है। इन हालातों का असर दुनिया भर के तेल बाजार पर पड़ रहा है।
- भारत के क्रूड बास्केट की कीमत फरवरी के 69 डॉलर से बढ़कर मार्च में 98 डॉलर प्रति बैरल हो गई है जो 42% का उछाल है।
- बाजार में Brent Crude 100.52 डॉलर और WTI Crude 95.66 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।
- सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन की विशेष छूट दी है। इस छूट से भारत समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीद सकेगा।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए सरकार के कदम
इस तनाव का सीधा असर भारतीय प्रवासियों और वहां काम कर रहे लोगों पर पड़ रहा है। फारस की खाड़ी में फिलहाल 28 कमर्शियल जहाजों पर 778 भारतीय नाविक मौजूद हैं। अमेरिकी राजदूत ने यह भी बताया कि हाल ही में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में कुछ भारतीयों की जान भी गई है।
- भारत के शिपिंग मंत्रालय ने भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर नजर रखने के लिए एक 24-घंटे का कंट्रोल रूम शुरू किया है।
- 12 मार्च को Shenlong Suezmax नाम का पहला जहाज सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर सुरक्षित मुंबई बंदरगाह पहुंचा है।
- भारत अब अपने 70% तेल आयात को होर्मुज के रास्ते से हटाकर दूसरे सुरक्षित रास्तों से मंगा रहा है ताकि कोई रुकावट ना आए।




