Israel-Iran War: Netanyahu का बड़ा आदेश, अब सार्वजनिक जगहों पर भी निशाना बनेंगे ईरानी अधिकारी
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी सेना और खुफिया एजेंसी मोसाद को ईरान के खिलाफ बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं। 19 मार्च 2026 को सामने आए इस आदेश के मुताबिक अब ईरानी शासन के अधिकारियों को सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भी निशाना बनाया जा सकता है। यह फैसला इजरायल और अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे Operation Epic Fury और Operation Roaring Lion के बीच लिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ईरानी शासन को कमजोर करना बताया गया है।
नेतन्याहू ने सेना को कौन सी नई शक्तियां दी हैं?
इजरायली प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री Israel Katz ने सेना (IDF) को स्पष्ट रूप से अधिकृत किया है कि वे किसी भी वरिष्ठ ईरानी अधिकारी को खत्म कर सकते हैं। इसके लिए अब अलग से किसी राजनीतिक अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। यदि किसी अधिकारी की खुफिया जानकारी और ऑपरेशनल डिटेल की पुष्टि हो जाती है, तो सेना तुरंत कार्रवाई कर सकेगी। नेतन्याहू ने कहा है कि वह ईरानी शासन की ताकत को खत्म करना चाहते हैं ताकि वहां के लोग इसे उखाड़ फेंक सकें।
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और ईरान की चेतावनी
अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने घोषणा की है कि अमेरिका ईरान के अंदर अब तक का सबसे बड़ा हमला करने की तैयारी में है। अमेरिकी सेना ईरान के हवाई क्षेत्र में काफी गहराई तक प्रवेश कर चुकी है और अब तक 7,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने चेतावनी दी है कि यदि उनके बुनियादी ढांचे पर फिर से हमला हुआ, तो वे कोई नरमी नहीं बरतेंगे। अब तक मारे गए कुछ प्रमुख अधिकारियों की सूची नीचे दी गई है:
| अधिकारी का नाम | पद/भूमिका |
|---|---|
| Ali Larijani | National Security Chief |
| Esmail Khatib | Intelligence Minister |
| Gholam Reza Soleimani | Basij Force Head |
| Ali Khamenei | Supreme Leader |
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
इजरायल ने हाल ही में पहली बार कैस्पियन सागर में ईरानी नौसेना के बुनियादी ढांचे पर हमला करने की पुष्टि की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन ने इन हत्याओं की निंदा की है और बल प्रयोग का विरोध किया है। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने का आग्रह किया है। दूसरी ओर नेतन्याहू ने हाल ही में एक पंच कार्ड दिखाते हुए संकेत दिया कि उनकी लिस्ट में शामिल कई नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं। इस रणनीति को लेकर कुछ पूर्व इजरायली अधिकारियों ने लंबे समय के परिणामों पर संदेह भी व्यक्त किया है।




