Strait of Hormuz में व्यापार के लिए UN ने बनाया नया नियम, अब खाद और जरूरी सामान की सप्लाई होगी आसान
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापार को सुरक्षित बनाने के लिए एक नए सिस्टम और टास्क फोर्स का ऐलान किया है। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष की वजह से इस समुद्री रास्ते से होने वाले व्यापार पर काफी बुरा असर पड़ा था। UN का मकसद यह है कि खाद और उससे जुड़े कच्चे माल की सप्लाई दुनिया भर में बिना रुके चलती रहे। इस नई पहल से उन देशों को राहत मिलेगी जो अनाज और खेती के सामान के लिए इस समुद्री रास्ते पर निर्भर हैं।
UN का नया सिस्टम कैसे काम करेगा?
UN के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि यह नया सिस्टम देशों की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूरा सम्मान करेगा। इस काम के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई है जिसका नेतृत्व अंडर-सेक्रेटरी-जनरल जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा करेंगे। इसमें UNCTAD, IMO और इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह सिस्टम पहले से चल रहे यमन और गाजा के UN मिशनों की तरह ही तकनीकी समाधान निकालेगा ताकि जहाजों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए।
दुनिया भर के बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
UN प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज के रास्ते जहाजों का आना-जाना इसी तरह बाधित रहा, तो पूरी दुनिया में खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो के अनुसार, इस संकट की वजह से होर्मुज से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या में 90% की बड़ी गिरावट आई है। यह रास्ता दुनिया के 30% खाद व्यापार को संभालता है, इसलिए इसकी सुरक्षा के लिए नया मैकेनिज्म बहुत जरूरी हो गया था।
जहाजों की सुरक्षा के लिए हुए कुछ अहम फैसले
| संस्था/देश | लिया गया फैसला |
|---|---|
| जी7 (G7) देश | ईरान से नागरिक जहाजों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने की अपील की। |
| इंडोनेशिया | पर्टामिना (Pertamina) के जहाजों की सुरक्षा के लिए ईरान से सीधी बातचीत की। |
| UNCTAD | मार्च में व्यापार में 95% की गिरावट दर्ज की और लागत बढ़ने पर चिंता जताई। |
| ईरान | इंडोनेशियाई जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने पर सकारात्मक जवाब दिया। |
UN के निजी दूत जीन अरनॉल्ट अब संबंधित देशों के साथ मिलकर राजनीतिक बातचीत करेंगे ताकि इस समुद्री क्षेत्र में शांति बनी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध आज भी खत्म हो जाए, तो भी बाजार को पटरी पर आने में कई महीने लग सकते हैं।





