Trump ने दी Iran को बड़ी चेतावनी, तेल कुओं और बिजली घरों को तबाह करने की धमकी, Strait of Hormuz खोलने की मांग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर जल्द ही समझौता नहीं हुआ और Strait of Hormuz को तुरंत नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के बिजली घरों, तेल के कुओं और Kharg Island को पूरी तरह तबाह कर देगा। इस बयान के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है, जिसका सीधा असर वहां की सुरक्षा और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है।
ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या धमकी दी है?
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि अगर तेहरान के साथ युद्ध खत्म करने का समझौता जल्द नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा। इसमें बिजली पैदा करने वाले प्लांट, तेल के कुएं और संभवतः पानी साफ करने वाले (desalinization) प्लांट भी शामिल हो सकते हैं। ट्रंप की मुख्य मांग है कि ईरान Strait of Hormuz के रास्ते को तुरंत खोले, जिसे ईरान ने फिलहाल ब्लॉक कर रखा है। राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि बातचीत में अच्छी प्रगति हो रही है, लेकिन कार्रवाई की धमकी बरकरार है।
इस तनाव के बीच क्या हैं ताजा हालात?
खाड़ी क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में स्थिति काफी गंभीर हुई है। ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई देखने को मिली है। ताजा घटनाक्रम कुछ इस प्रकार हैं:
- ईरान ने कुवैत के एक प्रमुख बिजली और पानी के प्लांट पर हमला किया है।
- इज़राइल की एक तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया है।
- स्पेन ने अमेरिकी विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का फैसला किया है।
- पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र इस विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।
- ईरान के विदेश मंत्रालय ने अभी तक अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों और प्रवासियों पर इसका क्या होगा असर?
मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने ट्रंप की इस धमकी पर चिंता जताई है। जानकारों का कहना है कि आम जनता के जीवन के लिए जरूरी बिजली ग्रिड या पानी के प्लांट को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सामूहिक दंड माना जाता है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि तेल और बिजली जैसे बुनियादी ढांचे पर हमले से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों पर भी इस युद्ध का बड़ा असर पड़ा है।




