US President Trump की NATO चीफ से मुलाक़ात, ईरान जंग में साथ न देने पर जताई नाराजगी, बोले ज़रूरत के वक़्त काम नहीं आए मित्र देश.
9 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और NATO के महासचिव Mark Rutte के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस मुलाक़ात के दौरान राष्ट्रपति Trump ने ईरान के साथ चली जंग में NATO देशों के रुख पर अपनी कड़ी निराशा व्यक्त की. उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि कई मित्र देशों ने युद्ध के समय अमेरिका का उस तरह साथ नहीं दिया जिसकी उम्मीद की जा रही थी. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता Karoline Leavitt ने बताया कि राष्ट्रपति का मानना है कि इस संकट की घड़ी में गठबंधन की एकजुटता की परीक्षा हुई और वे इसमें खरे नहीं उतरे.
NATO देशों से क्यों नाराज़ हैं राष्ट्रपति Donald Trump?
राष्ट्रपति Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर भी अपनी भड़ास निकाली और कहा कि जब अमेरिका को उनकी ज़रूरत थी, तब NATO वहां मौजूद नहीं था. जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन जैसे देशों ने ईरान के खिलाफ सैन्य भागीदारी से साफ़ मना कर दिया था. हालांकि, NATO चीफ Mark Rutte ने राष्ट्रपति की नाराजगी को समझते हुए कहा कि कई यूरोपीय देशों ने सीधे तौर पर लड़ने के बजाय लॉजिस्टिक्स, बेस और उड़ानों की अनुमति देकर मदद की थी. Rutte ने दोहराया कि NATO इस बात पर अडिग है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा.
ईरान के साथ युद्धविराम और ताज़ा हालात क्या हैं?
अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच 8 अप्रैल 2026 से दो हफ्ते का युद्धविराम लागू हो चुका है. इस शांति समझौते के बावजूद राष्ट्रपति Trump ने साफ़ किया है कि अमेरिकी सैन्य संपत्ति तब तक ईरान के आस-पास तैनात रहेगी जब तक कि परमाणु हथियारों को लेकर कोई असली और ठोस समझौता नहीं हो जाता. इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है. युद्ध और शांति की इस स्थिति के बीच कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार हैं:
| घटना | मुख्य जानकारी |
|---|---|
| तेल की कीमतें | युद्धविराम की घोषणा के बाद बाज़ार में कीमतों में कमी आई. |
| ईरान का फैसला | समुद्री सुरंगों के खतरे को देखते हुए नए जहाजी रास्तों का ऐलान किया. |
| UN की चेतावनी | इसराइल की लेबनान में बढ़ती गतिविधि शांति को खतरा पहुँचा सकती है. |
| शांति वार्ता | पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है. |
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर क्या होगा असर?
ईरान के साथ चल रहे इस तनाव और युद्धविराम का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों पर पड़ता है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का रास्ता सुरक्षित रहना व्यापार और यात्रा के लिए बहुत ज़रूरी है. राष्ट्रपति Trump ने भी कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता खुला और सुरक्षित रहना उनकी प्राथमिकता है. अगर यह इलाका अशांत रहता है, तो फ्लाइट्स के टिकट महंगे होने और तेल की कीमतों में उछाल आने का डर बना रहता है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ता है. फिलहाल संयुक्त राष्ट्र इस युद्धविराम को स्थायी बनाने की कोशिशों में जुटा है.





