ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए और वैकल्पिक रास्तों का ऐलान कर दिया है। यह फैसला समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों (Mines) के खतरे को देखते हुए लिया गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने साफ निर्देश दिया है कि समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जहाजों को मुख्य रास्ते के बजाय अब नए निर्धारित मार्गों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह बदलाव वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नए रास्तों को लेकर क्या निर्देश जारी हुए हैं?
ईरान की तरफ से जारी जानकारी के मुताबिक, ओमान की खाड़ी से आने वाले जहाजों को अब लारक द्वीप (Larak Island) के उत्तर की ओर से होकर फारस की खाड़ी की तरफ बढ़ने के लिए कहा गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यह कदम जहाजों को संभावित टकराव और पानी के अंदर मौजूद माइन के खतरे से बचाने के लिए उठाया गया है। यह नया समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय जल सीमा से बचते हुए ओमान की समुद्री सीमा के भीतर रहने के संकेत दे रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
क्षेत्र में हाल के दिनों में क्या बदलाव हुए हैं?
| तारीख | महत्वपूर्ण घटनाक्रम |
|---|---|
| 9 अप्रैल | ईरान ने इजरायली हमलों के जवाब में जलडमरूमध्य को बंद करने का निर्णय लिया, जिसे अमेरिका ने अस्वीकार्य बताया। |
| 8 अप्रैल | ईरानी विदेश मंत्री ने दो सप्ताह के लिए नौवहन मार्ग खोलने की बात कही थी। |
| 6 अप्रैल | IRGC ने नई सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और जहाजों से टोल वसूलने की तैयारी की चेतावनी दी। |
| 1 अप्रैल | संयुक्त राष्ट्र ने समुद्र में बारूदी सुरंगों के मूक और अदृश्य खतरे के बारे में अलर्ट जारी किया था। |
भारतीय जहाजों और खाड़ी देशों पर इसका क्या असर होगा?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का यह रास्ता भारत के लिए व्यापारिक लिहाज से बहुत जरूरी है। मार्च के महीने में भी भारत के दो बड़े LPG टैंकर, पाइन गैस और जग वसंत, इसी लारक द्वीप के पास वाले जलमार्ग से गुजरे थे। लारक द्वीप पर ईरान के सैन्य ठिकाने और रडार सिस्टम मौजूद हैं, इसलिए नए रास्तों के इस्तेमाल से भारतीय जहाजों को भी अपनी दिशा बदलनी होगी। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह खबर अहम है क्योंकि इस रास्ते में होने वाली किसी भी हलचल से खाड़ी देशों में जरूरी सामानों की सप्लाई और उनकी कीमतों पर असर पड़ सकता है।
