ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज जलडमरूमध्य, लेबनान पर हमले के बाद अमेरिका के साथ हुआ समझौता खतरे में, बढ़ी खाड़ी की टेंशन.
ईरान और अमेरिका के बीच हुआ दो हफ्ते का युद्धविराम शुरू होते ही बड़े खतरे में पड़ गया है। बुधवार 8 अप्रैल 2026 को ईरान की लावन तेल रिफाइनरी पर हमले और लेबनान में इसराइली एयर स्ट्राइक के बाद तेहरान ने कड़ा रुख अपना लिया है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को एक बार फिर बंद कर दिया है। इस फैसले से खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और प्रवासियों के साथ-साथ आम जनता की चिंताएं भी बढ़ गई हैं क्योंकि इससे तेल की कीमतों और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है।
ℹ️: लेबनान पर इसराइल के हमले से भड़का फ्रांस, कहा अमेरिका-ईरान सीजफायर में लेबनान को भी करें शामिल।
ईरान ने क्यों बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्या है विवाद?
ईरान का कहना है कि जब तक शांति समझौते की सभी शर्तों को पूरी तरह से नहीं माना जाता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला जाएगा। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने साफ तौर पर कहा है कि लेबनान में युद्धविराम उनके समझौते की सबसे मुख्य शर्त थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस का कहना है कि इसराइल और लेबनान का विवाद इस समझौते का हिस्सा नहीं था। इसी खींचतान के बीच बुधवार को ईरान की लावन रिफाइनरी पर हमला हुआ, जिसे ईरान ने दुश्मनों की साजिश बताया है।
ताजा हमलों के आंकड़े और खाड़ी देशों पर असर
इस तनाव का असर लेबनान से लेकर कुवैत और UAE तक देखा जा रहा है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बुधवार को हुए हमलों में 182 लोगों की जान गई है। वहीं खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है क्योंकि कई जगहों पर ड्रोन और मिसाइल देखे जाने की खबरें आई हैं।
| प्रमुख घटना | तारीख / समय | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| अमेरिका-ईरान युद्धविराम | 7 अप्रैल 2026 | समझौता अब खतरे में |
| लावन रिफाइनरी हमला | 8 अप्रैल, सुबह 10:00 | कोई हताहत नहीं, तनाव बढ़ा |
| स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद | 8 अप्रैल 2026 | आवाजाही पूरी तरह ठप |
| कुवैत में ड्रोन गतिविधि | 8 अप्रैल, दोपहर तक | 28 ईरानी ड्रोन देखे गए |
| पाकिस्तान में अगली बैठक | 10 अप्रैल 2026 | शांति बहाली पर होगी चर्चा |
क्या होगा प्रवासियों और आम आदमी पर असर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने का मतलब है कि समुद्री रास्ते से होने वाला व्यापार और तेल की सप्लाई रुक सकती है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह खबर चिंताजनक है क्योंकि इससे जरूरी सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि इसराइल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई इस नाजुक शांति समझौते को पूरी तरह खत्म कर सकती है। अब सबकी नजरें शुक्रवार 10 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली हाई-लेवल मीटिंग पर टिकी हैं।





