अमेरिका का इराक को सख्त आदेश, ईरान समर्थित गुटों को तुरंत करें खत्म, कुवैत हमले के बाद लिया बड़ा फैसला.
अमेरिका ने इराक सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वह अपनी धरती पर सक्रिय ईरान समर्थक गुटों को तुरंत खत्म करे और उनकी जवाबदेही तय करे। यह बयान 7 अप्रैल को बसरा में कुवैत के दूतावास पर हुए हमले के बाद आया है। अमेरिका का मानना है कि ये गुट इराक के संसाधनों का इस्तेमाल करके पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। इस मुद्दे पर अमेरिकी विदेश विभाग ने इराक से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
📰: Saudi और Pakistan के विदेश मंत्रियों ने की फोन पर बात, क्षेत्र में सुरक्षा बहाली पर हुई खास चर्चा.।
अमेरिकी पत्रकार की रिहाई और मौजूदा समझौता
हाल ही में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है जहां एक अमेरिकी पत्रकार को रिहा कराया गया है। इसके बदले में कुछ कैदियों को छोड़ना पड़ा है। इससे जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- अमेरिकी पत्रकार Shelly Kittleson को 31 मार्च को अगवा किया गया था जिन्हें अब रिहा कर दिया गया है।
- इस पत्रकार की रिहाई के बदले इराक ने कताइब हिजबुल्ला के 16 सदस्यों को जेल से छोड़ा है।
- कताइब हिजबुल्ला ने चेतावनी दी है कि ऐसी पहल दोबारा नहीं होगी और पत्रकार को तुरंत इराक छोड़ना होगा।
- अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए अस्थायी युद्धविराम पर भी सहमति बनी है।
राष्ट्रपति ट्रम्प की नई चेतावनी और सख्त नियम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के मुद्दे पर बहुत सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान समझौतों का पूरी तरह पालन नहीं करता, अमेरिकी सेना वहां से नहीं हटेगी। इसके अलावा व्यापार को लेकर भी उन्होंने बड़ा ऐलान किया है।
| नियम का प्रकार | मुख्य फैसला |
|---|---|
| सैन्य उपस्थिति | अमेरिकी फौज ईरान के आसपास तैनात रहेगी |
| नया आयात टैक्स | ईरान को हथियार देने वाले देशों पर 50% अतिरिक्त शुल्क लगेगा |
| समुद्री रास्ता | होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर तालमेल होगा |
| इराकी जिम्मेदारी | विदेशी राजनयिकों और दूतावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है |
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी पुष्टि की है कि अमेरिका अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इराक में रहने वाले प्रवासियों और वहां काम कर रहे भारतीयों के लिए भी यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।




