लेबनान युद्धविराम पर विवाद, पाकिस्तान और फ्रांस के बीच हुई बात, ईरान ने इस्लामाबाद वार्ता से किया इनकार
लेबनान में युद्धविराम को लेकर दुनिया के बड़े देशों के बीच खींचतान चल रही है। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar और फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noël Barrot ने फोन पर इस मुद्दे पर चिंता जताई। वहीं, Israel के हमले और अमेरिका के रुख ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है, जिससे शांति वार्ता पर संकट मंडरा रहा है।
लेबनान युद्धविराम को लेकर विवाद क्या है?
पाकिस्तान और ईरान का दावा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ युद्धविराम समझौता लेबनान पर भी लागू होता है। लेकिन अमेरिका और Israel इस बात से पूरी तरह असहमत हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने स्पष्ट किया कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था और इसे ईरान की गलतफहमी बताया। Israel के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के कार्यालय ने भी पुष्टि की कि उनके अभियान उत्तरी सीमा को सुरक्षित करने के लिए जारी रहेंगे।
Israel का हमला और ईरान का कड़ा फैसला
9 अप्रैल 2026 को Israel ने लेबनान पर एक बड़ा हमला किया, जिसमें 200 से अधिक लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। Israel ने दावा किया कि उसने हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया। इस घटना के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने घोषणा की कि उसका प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में तब तक भाग नहीं लेगा, जब तक Israel हमले बंद नहीं करता और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धता पूरी नहीं करता।
पाकिस्तान की तैयारी और मौजूदा स्थिति
पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और Ishaq Dar ने पहले दावा किया था कि युद्धविराम हर जगह लागू है। हालांकि, ईरान की हिचकिचाहट के बावजूद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद वार्ता के लिए तैयारियां जारी रखी हैं। प्रतिनिधियों और पत्रकारों को बिना वीजा प्रवेश की अनुमति देने के लिए एयरलाइंस को नोटिस जारी किया गया है और शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।





