ईरान ने चीन से मांगी मदद, अमेरिका के साथ बातचीत में गारंटी बनने की अपील, कल पाकिस्तान में शुरू होगी बैठक
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर चीन से अनुरोध किया है कि वह वाशिंगटन के साथ होने वाली बातचीत में गारंटर यानी गारंटी लेने वाले देश के रूप में शामिल हो। यह बातचीत कल यानी 11 अप्रैल 2026 से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होने जा रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों देशों को इस चर्चा के लिए आमंत्रित किया है और इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत की मुख्य बातें क्या हैं?
अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली यह बातचीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- यह बैठक शनिवार 11 अप्रैल 2026 से शुरू होगी और लगभग 15 दिनों तक चल सकती है।
- दोनों देशों के बीच 7 अप्रैल को घोषित हुआ संघर्षविराम 8 अप्रैल से प्रभावी हो चुका है।
- अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance करेंगे, जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री Abbas Araghchi शामिल होंगे।
- पाकिस्तान इस पूरी शांति प्रक्रिया की मेजबानी कर रहा है और उसने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
- चीन ने भी ईरान को इस वार्ता के लिए राजी करने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
ईरान और चीन की शर्तों और चुनौतियों को समझें
ईरान के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अमेरिका पर भरोसा नहीं है, इसलिए वे चाहते हैं कि चीन समझौते का गारंटर बने ताकि भविष्य में नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Mao Ning ने कहा है कि वे शांति के लिए अपनी भूमिका निभाते रहेंगे, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार बीजिंग पूरी तरह गारंटर बनने की जिम्मेदारी लेने से थोड़ा हिचक रहा है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी बातचीत में भागीदारी इस बात पर निर्भर करेगी कि लेबनान में इजरायली हमले रुकते हैं या नहीं। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर ईरान के इरादों पर संदेह जताया है।




