भारती एयरटेल और टाटा ग्रुप की टेलीकॉम कंपनियां अब सरकार से संपर्क साधने की तैयारी कर रही हैं। इनका उद्देश्य वोडाफोन आइडिया (Vi) की तरह ‘एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू’ (AGR) बकाये के भुगतान में छूट प्राप्त करना है। सूत्रों के मुताबिक, इन कंपनियों ने फैसला किया है कि वे संयुक्त रूप से सरकार के सामने अपनी बात रखेंगी। साथ ही, जब तक सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए एक समान नियम नहीं बनाए जाते, तब तक वे बकाये का भुगतान शुरू नहीं करेंगे।
वोडाफोन आइडिया को मिली विशेष छूट
हाल ही में सरकार ने वोडाफोन आइडिया की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए उसे बड़ी राहत दी है। टेलीकॉम विभाग (DoT) ने Vi के 87,695 करोड़ रुपये के बकाये को साल 2035 तक के लिए रोक (freezed) दिया है। इसका मतलब है कि Vi को अभी भुगतान नहीं करना होगा। इसके विपरीत, एयरटेल और टाटा ग्रुप की कंपनियों के लिए भुगतान की समय सीमा इस साल मार्च से शुरू हो रही है। इन कंपनियों का तर्क है कि बाजार में निष्पक्ष प्रतियोगिता बनाए रखने के लिए सभी को समान अवसर मिलने चाहिए।
किस कंपनी पर कितना बकाया है?
आंकड़ों पर नजर डालें तो वोडाफोन आइडिया के बाद एयरटेल और टाटा ग्रुप पर भी भारी भरकम एजीआर (AGR) का कर्ज है। टाटा टेलीसर्विसेज (TTSL) और टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्ट्र (TTML) का संयुक्त बकाया तीसरे स्थान पर सबसे अधिक है। नीचे दी गई तालिका में देखिए किस कंपनी पर कितना बोझ है:
| कंपनी का नाम | AGR बकाया राशि (करोड़ रुपये में) | भुगतान की स्थिति |
|---|---|---|
| वोडाफोन आइडिया (Vi) | 87,695 | 2035 तक स्थगित |
| भारती एयरटेल | 48,103 | मार्च 2026 से शुरू |
| टाटा ग्रुप (TTSL/TTML) | 19,259 | मार्च 2026 से शुरू |
पहले मिली थी चार साल की मोहलत
सितंबर 2021 में, सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर को संकट से उबारने के लिए चार साल का मोरेटोरियम (भुगतान पर रोक) दिया था। यह अवधि वित्त वर्ष 2026 तक के लिए थी। नियमों के अनुसार, कंपनियों को ब्याज सहित अपनी किस्तों का भुगतान अब शुरू करना था। यह राहत इसलिए दी गई थी ताकि कंपनियां अपने नेटवर्क को सुधार सकें और आर्थिक रूप से स्थिर हो सकें। हालांकि, अब जब वोडाफोन आइडिया को अतिरिक्त समय मिल गया है, तो बाकी कंपनियां भी वैसी ही सुविधा की मांग कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट और कानूनी विकल्प
कंपनियां सरकार से बात करने के अलावा कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही हैं। हालांकि, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वह सरकार के नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। कोर्ट ने माना था कि वोडाफोन आइडिया को डूबने से बचाने और बाजार में एकाधिकार (Monopoly) को रोकने के लिए सरकार विशेष राहत दे सकती है। कानूनी जानकारों का कहना है कि एयरटेल और टाटा के लिए कोर्ट से ‘समानता के अधिकार’ के तहत राहत मांगना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि उनकी वित्तीय हालत वोडाफोन आइडिया जैसी खराब नहीं है।
एयरटेल की मजबूत आर्थिक स्थिति
एयरटेल ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। कंपनी मुनाफे में है और उसका बाजार में 40% हिस्सा है। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी के पास 55,300 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग फ्री कैश फ्लो था। एयरटेल के एमडी गोपाल विट्टल पहले ही कह चुके हैं कि कंपनी के पास भुगतान करने की क्षमता है, लेकिन वे चाहते हैं कि सरकार सभी के साथ एक जैसा व्यवहार करे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सिर्फ एक कंपनी को राहत मिलती है, तो यह बाजार के संतुलन को बिगाड़ सकता है।
Last Updated: 16 January 2026





