नोएडा के जेपी विशटाउन (Jaypee Wish Town) में अपने घर का सपना देख रहे हजारों लोगों के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड (JIL) को खरीदने वाली कंपनी ‘सुरक्षा ग्रुप’ अब खुद कानूनी शिकंजे में फंस गई है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सुरक्षा ग्रुप के खिलाफ होमबायर्स के पैसे के गलत इस्तेमाल का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि फ्लैट्स के निर्माण के लिए रखे गए 230 करोड़ रुपये से ज्यादा के फंड को इधर-उधर किया गया है, जिससे रुके हुए प्रोजेक्ट्स के पूरा होने पर फिर से सवालिया निशान लग गया है।
FIR और आरोपों की पूरी कहानी
दिल्ली पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से मिली शिकायत के आधार पर 1 जनवरी 2026 को यह FIR दर्ज की है। इसमें सुरक्षा रियल्टी और उसकी सहयोगी कंपनी लक्षदीप इन्वेस्टमेंट्स एंड फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड का नाम शामिल है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है। ED ने अपनी जांच में पाया कि सुरक्षा ग्रुप जेपी इन्फ्राटेक के खातों से पैसे निकालकर दूसरी जगहों पर लगा रहा था, जबकि यह पैसा सिर्फ रुके हुए अपार्टमेंट के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए था।
17,000 खरीदारों का भविष्य अधर में
इस खबर ने एक बार फिर जेपी विशटाउन के लगभग 17,000 घर खरीदारों की नींद उड़ा दी है। खास तौर पर सेक्टर 120 स्थित विशटाउन प्रोजेक्ट के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सुरक्षा ग्रुप ने 2024 में एक लंबी कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी (दिवालिया) प्रक्रिया के बाद जेपी इन्फ्रा का अधिग्रहण किया था। होमबायर्स को उम्मीद थी कि अब उन्हें उनके घर मिल जाएंगे, जिसका वादा एक दशक पहले किया गया था। लेकिन फंड डायवर्जन की इस खबर ने पुराने जख्म फिर हरे कर दिए हैं।
फंड का गलत इस्तेमाल कैसे हुआ?
जांच एजेंसी के मुताबिक, होमबायर्स से जमा किए गए पैसे और यमुना एक्सप्रेसवे के टोल से हुई कमाई का सही इस्तेमाल नहीं किया गया। आरोपों के अनुसार, इस पैसे को प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय ग्रुप की दूसरी कंपनियों जैसे कि ITI गोल्ड लोन्स और ITI हाउसिंग फाइनेंस में भेज दिया गया। इसके अलावा, लगभग 107 करोड़ रुपये जेपी हेल्थकेयर लिमिटेड की बिक्री के जरिए ITI म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए। एजेंसी ने इसे घर खरीदारों के साथ “विश्वास का उल्लंघन” और एक बड़ी धोखाधड़ी बताया है।
ED की सख्त कार्रवाई और गिरफ्तारियां
ED पिछले काफी समय से जेपी ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों की जांच मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कर रही है। एजेंसी का मानना है कि घर खरीदारों के फंड में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। इस मामले में अब तक की गई प्रमुख कार्रवाइयों का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:
| तारीख/समय | कार्रवाई | विवरण |
|---|---|---|
| मई 2025 | छापेमारी (Searches) | ED ने दिल्ली-NCR और मुंबई में 15 स्थानों पर छापेमारी की और फंड डायवर्जन से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए। |
| नवंबर 2025 | गिरफ्तारी | JIL के पूर्व प्रमोटर मनोज गौर को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया। उन पर ग्रुप ट्रांजेक्शन के जरिए पैसों की हेराफेरी का आरोप है। |
| जनवरी 2026 | FIR दर्ज | ED की सूचना पर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा ग्रुप के खिलाफ 230 करोड़ रुपये के गबन का मामला दर्ज किया। |
सुरक्षा ग्रुप का दावा और आगे की राह
इन गंभीर आरोपों के बीच, सुरक्षा ग्रुप ने हाल ही में दावा किया था कि उसने नोएडा में 63 रेजिडेंशियल टावरों में लगभग 6,000 यूनिट्स (फ्लैट्स) का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। अपने रेजोल्यूशन प्लान में ग्रुप ने अगले चार सालों में लगभग 20,000 अपार्टमेंट पूरे करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, अब FIR दर्ज होने के बाद प्रोजेक्ट की रफ्तार और खरीदारों के भरोसे पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है। फिलहाल सुरक्षा ग्रुप या दिल्ली पुलिस की ओर से जांच की अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
Last Updated: 16 January 2026





