ब्रिटेन के पीएम Keir Starmer का बड़ा फैसला, ईरान में जमीनी सेना भेजने से किया साफ इनकार
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने स्पष्ट किया है कि यूनाइटेड किंगडम ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अपनी जमीनी सेना नहीं भेजेगा। 30 मार्च 2026 को दिए गए इस बयान में उन्होंने कहा कि वह ब्रिटेन को इस युद्ध में शामिल होने से बचाना चाहते हैं। उन्होंने इसे हमारी जंग नहीं बताते हुए अपनी घरेलू प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की बात कही है। यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ब्रिटेन के रुख को स्पष्ट करता है और तनाव को कम करने की दिशा में देखा जा रहा है।
ब्रिटेन की सेना और सुरक्षा को लेकर क्या है नई योजना?
- प्रधानमंत्री ने साफ किया है कि ब्रिटेन की जमीनी सेना ईरान के युद्ध में हिस्सा नहीं लेगी।
- ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का उपयोग केवल रक्षात्मक स्ट्राइक और मिसाइलों को रोकने के लिए करने की अनुमति दी है।
- रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए HMS Dragon को पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात किया गया है।
- Cyprus में भी ब्रिटिश सैन्य संपत्तियों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
- Keir Starmer ने साफ किया कि वह वाशिंगटन या किसी अन्य बाहरी दबाव में आकर सेना नहीं भेजेंगे।
- ब्रिटेन अब भी Strait of Hormuz में समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
क्षेत्रीय स्थिति और अन्य देशों के बड़े फैसले
स्पेन सरकार ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है और अपने हवाई क्षेत्र को अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए बंद कर दिया है। रक्षा मंत्री Margarita Robles ने कहा कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने बेस का इस्तेमाल नहीं करने देंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय ने लेबनान से अपने राजदूत को वापस बुलाने के आदेश को फिलहाल खारिज कर दिया है।
इसी बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने ऊर्जा, शिपिंग और फाइनेंस सेक्टर के लीडर्स के साथ एक बैठक भी की है। इस मीटिंग में ईरान संघर्ष के कारण होने वाले आर्थिक असर और Strait of Hormuz की सुरक्षा पर चर्चा हुई। जानकारों का कहना है कि 20 मार्च को Diego Garcia बेस पर हुए मिसाइल हमले के बाद से ही पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ी हुई है और वे फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।




