अरब से लौटने वालों के लिए खुशखबरी, भारत में ड्राई क्लीनिंग बिजनेस से महीने का 2 लाख मुनाफा, जानिए कैसे
अरब देशों में सालों तक नौकरी करने के बाद कई भारतीय अपने देश लौटकर खुद का काम शुरू करना चाहते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ड्राई क्लीनिंग दुकान की कमाई का आंकड़ा वायरल हुआ है जिसने सबको हैरान कर दिया है। नलिनी उनागर नामक यूजर ने बताया कि एक छोटी सी दुकान से महीने का मुनाफा 2 लाख रुपये से अधिक हो सकता है। यह बिजनेस उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है जो स्किल्ड हैं और मेहनत करना जानते हैं।
कमाई और खर्चे का पूरा हिसाब
दुकान के आंकड़ों के अनुसार रोजाना लगभग 350 कपड़े प्रेस किए जाते हैं जिनसे 3,500 रुपये की आमदनी होती है। इसके साथ ही 20 भारी कपड़ों की ड्राई क्लीनिंग से 7,000 रुपये रोजाना मिलते हैं। कुल मिलाकर एक दिन की कमाई 10,500 रुपये तक पहुंच जाती है। महीने में 27 दिन काम करने पर कुल इनकम 2.83 लाख रुपये होती है। बिजली और दो हेल्पर की सैलरी जैसे खर्चे निकालने के बाद भी मालिक के पास 2.37 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा बचता है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि दुकान मालिक की अपनी जगह है इसलिए किराया नहीं देना पड़ता है।
रिटर्न होने वाले प्रवासियों के लिए सरकारी योजनाएं और निवेश
खाड़ी देशों से लौटने वाले कुशल श्रमिकों के लिए भारत सरकार कई विशेष सुविधाएं दे रही है। SWADES स्कीम के तहत कौशल के हिसाब से स्वरोजगार में मदद दी जाती है। इसके अलावा मुद्रा योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का बिना गारंटी वाला लोन लिया जा सकता है। बिजनेस शुरू करने के लिए कुछ जरूरी नियम भी हैं जैसे शॉप एंड एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में रजिस्ट्रेशन और प्रदूषण बोर्ड से एनओसी लेना जरूरी हो सकता है। इस बिजनेस के बाजार और निवेश की जानकारी नीचे दी गई है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| छोटा सेटअप निवेश | 8 लाख से 15 लाख रुपये |
| मध्यम सेटअप निवेश | 20 लाख से 30 लाख रुपये |
| मुनाफा मार्जिन | 25% से 35% के बीच |
| सरकारी लोन सुविधा | मुद्रा लोन (PMMY) 10 लाख तक |
| जरूरी रजिस्ट्रेशन | MSME और शॉप एक्ट |
विशेषज्ञों की राय और बाजार की स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार भारत का लॉन्ड्री बाजार 2025 तक 7,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। इस क्षेत्र में अभी भी 80 से 90 प्रतिशत बाजार असंगठित है जिससे नए लोगों के लिए काफी मौके हैं। खाड़ी देशों से लौटने वाले भारतीय ASEEM पोर्टल के जरिए भी स्थानीय व्यावसायिक अवसरों से जुड़ सकते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि अगर दुकान किराए की है तो मुनाफे का एक हिस्सा यानी 30 हजार से 70 हजार रुपये तक किराए में जा सकता है।





