EU का बड़ा ऐलान, Strait of Hormuz में रुके हुए तेल और खाने के सामान के लिए बनेगा नया कॉरिडोर
यूरोपियन यूनियन (EU) की हाई रिप्रेजेंटेटिव Kaja Kallas ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते विवाद के बीच एक अहम जानकारी साझा की है. 16 मार्च 2026 को Brussels में हुई विदेशी मामलों की मीटिंग के बाद उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही को दोबारा शुरू करना EU की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. इस रास्ते से खाद, खाना और एनर्जी की सप्लाई होती है. इन चीजों के रुकने से दुनियाभर में बड़ा संकट आ सकता है और इसलिए EU स्थिति को सामान्य करने पर फोकस कर रहा है.
Strait of Hormuz में क्या है पूरा मामला?
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे मौजूदा विवाद के कारण Strait of Hormuz कमर्शियल जहाजों के लिए लगभग बंद हो चुका है. यह रास्ता दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्व रखता है.
- इस रास्ते से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और LNG सप्लाई होता है.
- ब्लॉकेड के कारण एशियाई बाजारों में जाने वाले करीब 85 प्रतिशत तेल पर असर पड़ा है.
- EU का मानना है कि अगर इस रास्ते से खाद और खाने के सामान की सप्लाई जल्द शुरू नहीं हुई, तो 2027 तक दुनिया में खाने की भारी कमी हो सकती है.
UN के साथ मिलकर EU का नया प्लान
Kaja Kallas ने जानकारी दी है कि उन्होंने UN के सेक्रेटरी-जनरल António Guterres के साथ एक खास पहल पर बात की है. इसे Black Sea-style इनिशिएटिव की तरह तैयार किया जा रहा है. इसके तहत एक सुरक्षित इंटरनेशनल कॉरिडोर बनाने की तैयारी है ताकि कमर्शियल जहाजों को बिना किसी डर के निकाला जा सके.
फिलहाल रेड सी में चल रहे EU के Operation Aspides को Strait of Hormuz तक ले जाने पर भी चर्चा हुई. हालांकि अभी सदस्य देश इस इलाके में किसी सीधी सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति के जरिये मामले को सुलझाने पर जोर दे रहे हैं. Operation Aspides का मैंडेट पहले ही फरवरी 2027 तक बढ़ाया जा चुका है.
एशिया और भारत पर इसका क्या असर है?
Strait of Hormuz का बंद होना एशियाई देशों के लिए एक बड़ी परेशानी है क्योंकि एशिया काफी हद तक इसी रूट से आने वाले तेल पर निर्भर है. इस गंभीरता को देखते हुए भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने भी Brussels में हुई अनौपचारिक चर्चा में हिस्सा लिया.
EU हालात को स्थिर करने के लिए कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहा है ताकि किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध से बचा जा सके. इसके साथ ही, मिडिल ईस्ट में स्थिति को संभालने के लिए EU ने फिलिस्तीन, लेबनान, सीरिया, जॉर्डन और मिस्र को हर साल 450 मिलियन यूरो से अधिक की मानवीय मदद देने की भी पुष्टि की है.




