निर्मला सीतारमण का बड़ा ऐलान, 4 राज्यों में बनेगा Rare Earth कॉरिडोर, हजारों करोड़ का होगा निवेश
केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बड़ी घोषणा की है। सरकार ने देश के चार खनिज संपन्न राज्यों में ‘रेयर अर्थ मैग्नेट कॉरिडोर’ बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य मकसद महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में चीन जैसे देशों पर भारत की निर्भरता को कम करना है। यह नई परियोजना तमिलनाडु, केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में शुरू की जाएगी, जिससे इन राज्यों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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किन राज्यों को मिलेगा फायदा और क्या है पूरा प्लान?
सरकार की योजना के मुताबिक, यह कॉरिडोर उन जगहों पर बनाया जाएगा जहां पहले से ही खनिज संसाधन मौजूद हैं। इसमें तमिलनाडु, केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का नाम शामिल है। अभी भारत रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए 90% तक चीन पर निर्भर है। इस निर्भरता को खत्म करने के लिए सरकार ने देश के अंदर ही 6,000 मीट्रिक टन सालाना उत्पादन क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ग्लोबल लेवल पर कंपनियों को बोली लगाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा और सबसे कम लागत वाले सिस्टम (LCS) के आधार पर उनका चुनाव होगा।
सरकार कितना पैसा खर्च करेगी और क्या मिलेगी छूट?
इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने भारी-भरकम बजट तय किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना के लिए कुल 7,280 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसमें फैक्ट्रियां लगाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरह की मदद दी जाएगी। केरल सरकार ने भी अलग से घोषणा की है कि उनके राज्य में बनने वाले कॉरिडोर से 42,000 करोड़ रुपये का निवेश आ सकता है और 50,000 लोगों को नौकरी मिल सकती है।
फंड का हिसाब-किताब इस प्रकार है:
| बिक्री पर आधारित इंसेंटिव (SLI) | 6,450 करोड़ रुपये |
| फैक्ट्री लगाने के लिए सब्सिडी | 750 करोड़ रुपये |
| कुल मिशन का बजट (NCMM) | 34,300 करोड़ रुपये |
इस योजना को लागू करने के लिए 7 साल का समय रखा गया है। इसमें शुरुआती 2 साल निर्माण और सेटअप के लिए होंगे, जबकि अगले 5 साल तक कंपनियों को इंसेंटिव दिया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दिलाने के लिए ‘परिवेश पोर्टल’ पर एक अलग विंडो भी बनाई गई है ताकि काम में देरी न हो।





