Strait of Hormuz: फ्रांस ने अमेरिका को दिया झटका, युद्ध के बीच सेना भेजने से किया साफ़ इनकार
फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने साफ कर दिया है कि उनका देश Strait of Hormuz में चल रहे युद्ध के बीच कोई सैन्य अभियान नहीं करेगा। 17 मार्च 2026 को कैबिनेट मीटिंग में उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस इस लड़ाई का हिस्सा नहीं है। अमेरिका ने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए सैन्य गठबंधन बनाने की मांग की थी, जिसे फ्रांस और European Union ने सिरे से खारिज कर दिया है।
अमेरिका की मांग और फ्रांस का जवाब
अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों से मांग की थी कि वे Strait of Hormuz को जबरन खोलने के लिए अपने युद्धपोत भेजें। इसके जवाब में Macron ने कहा कि जब तक इस क्षेत्र में हमले रुक नहीं जाते, फ्रांस कोई भी सैन्य कदम नहीं उठाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि फ्रांस का मकसद सिर्फ बचाव करना है और वह किसी आक्रामक कार्रवाई में शामिल नहीं होगा।
European Union के कई बड़े नेताओं ने भी फ्रांस का समर्थन किया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि यह यूरोप का युद्ध नहीं है। फ्रांस का एयरक्राफ्ट कैरियर Charles de Gaulle अभी साइप्रस के पास तैनात है, जिसका काम सिर्फ नाटो बेस और अपने नागरिकों की सुरक्षा करना है।
तेल की कीमतों में उछाल और आगे की रणनीति
अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। इसका सीधा असर दुनिया भर के बाजार पर पड़ रहा है और कच्चे तेल (Brent crude) की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। तनाव के बावजूद फ्रांस बातचीत से मामला सुलझाने के पक्ष में है।
फ्रांस फिलहाल भारत, मलेशिया और अन्य खाड़ी देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि तनाव कम होने के बाद जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता बनाया जा सके। नौसेना के जानकारों का भी मानना है कि युद्ध के दौरान इस इलाके में कोई भी जहाज भेजना आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।




