खाड़ी में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए G7 का बड़ा कदम, अमेरिका और सहयोगियों ने बनाया नया प्लान
G7 देशों के नेताओं ने खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों को सैन्य सुरक्षा देने पर सहमति जताई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण जहाजों की सुरक्षा को लेकर यह बड़ा फैसला लिया गया है। इस काम के लिए एक खास वर्किंग ग्रुप भी बनाया गया है जो शिपिंग कंपनियों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और इंश्योरेंस देने वालों के साथ मिलकर काम करेगा।
G7 का नया वर्किंग ग्रुप और इंश्योरेंस प्लान
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी के रास्ते व्यापार में 95 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। व्यापार को वापस पटरी पर लाने के लिए ‘Navigation Freedom Initiative’ नाम से एक अभियान शुरू किया गया है। जहाजों और सामान के नुकसान की भरपाई के लिए अमेरिका ने 20 बिलियन डॉलर की रीइंश्योरेंस सुविधा चालू की है। इस सुविधा का फायदा कंपनियों को तब मिलेगा जब सुरक्षा के सही इंतजाम हो जाएंगे।
- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वीडियो कॉल के जरिए यह अहम मीटिंग बुलाई थी।
- बाजार को स्थिर रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) इमरजेंसी रिजर्व से 40 करोड़ बैरल तेल निकालने पर विचार कर रही है।
- लॉयड और मार्श जैसी बड़ी इंटरनेशनल इंश्योरेंस कंपनियां भी इस नए वर्किंग ग्रुप के साथ चर्चा कर रही हैं।
समुद्र में अभी क्या हैं हालात?
भले ही G7 ने सुरक्षा देने का प्लान बनाया है, लेकिन अमेरिकी नौसेना ने शिपिंग कंपनियों को साफ बताया है कि अभी हमलों का खतरा बहुत ज्यादा है, इसलिए तुरंत एस्कॉर्ट (सुरक्षा घेरा) देना संभव नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि सही समय आने पर ही अमेरिकी नेवी जहाजों को सुरक्षा देगी।
हाल ही में 11 मार्च को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन जहाजों पर हमला किया। इसके अलावा यूएई के तट के पास भी एक कंटेनर जहाज पर किसी अज्ञात चीज से हमला हुआ है। इन घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों की आवाजाही इस रूट पर लगभग जीरो हो गई है। कच्चे तेल के दाम भी काफी ऊपर-नीचे हो रहे हैं और फिलहाल 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहे हैं।




