गोपालगंज में औद्योगिक क्रांति का आगाज, जिले में 2200 करोड़ के एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट को मिली मंजूरी
बिहार के गोपालगंज जिले में अब विकास की एक नई लहर देखने को मिल रही है। सरकार ने औद्योगिक क्रांति और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 13 फरवरी 2026 को समीक्षा बैठक के दौरान बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को जिले में ही रोजगार देना है ताकि उन्हें खाड़ी देशों या अन्य राज्यों में पलायन न करना पड़े।
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चीनी मिलों का पुनरुद्धार और नया औद्योगिक क्षेत्र
जिले में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सासामुसा चीनी मिल को फिर से शुरू करने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही विजयीपुर ब्लॉक में 32.66 एकड़ भूमि पर एक नए औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना को मंजूरी मिली है। BIADA को इसके लिए 11.39 करोड़ रुपये की लागत से भूमि हस्तांतरित कर दी गई है। जिले में इथेनॉल हब बनाने की दिशा में भी काम जारी है जिसमें सिधवलिया और विष्णु शुगर मिल में करोड़ों का निवेश किया जाएगा।
- सासामुसा चीनी मिल के शुरू होने से स्थानीय किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।
- विष्णु शुगर मिल परिसर में 100 करोड़ की लागत से तीसरा इथेनॉल प्लांट लगेगा।
- सिधवलिया में 162 करोड़ रुपये का नया इथेनॉल प्रोजेक्ट पाइपलाइन में है।
सबेया एयरपोर्ट और हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क
कनेक्टिविटी के मामले में भी गोपालगंज लंबी छलांग लगाने को तैयार है। हथुआ स्थित सबेया एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल के लिए रक्षा मंत्रालय ने 4 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं और इसका काम जनवरी 2025 में शुरू हो चुका है। केंद्र की UDAN योजना के तहत 2026 तक यहां से घरेलू उड़ानें शुरू होने की संभावना है। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे और हाईवे का जाल बिछाया जा रहा है जो जिले की आर्थिक स्थिति को मजबूती देगा।
| प्रोजेक्ट का नाम | विवरण और लागत |
|---|---|
| Gopalganj-Patna Expressway | 2200 करोड़ की लागत, पटना तक का सफर 1.5 घंटा होगा |
| NH-727B Highway | जिले को सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (UP) से जोड़ेगा |
| थावे मेडिकल कॉलेज | 500-600 करोड़ की लागत से अस्पताल का निर्माण |
| मॉडल टाउनशिप | शहर के आसपास के 65 गांवों का होगा विकास |
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सदर अस्पताल को 33 करोड़ की लागत से 100 बेड वाले मॉडल अस्पताल में अपग्रेड किया जा रहा है। थावे में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के लिए भी प्रक्रिया चल रही है। इन तमाम परियोजनाओं से गोपालगंज अब केवल खेती पर निर्भर न रहकर एक लॉजिस्टिक और औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेगा जिससे खाड़ी देशों में काम करने वाले श्रमिकों को अपने घर के पास ही तकनीकी काम के विकल्प मिलेंगे।




