हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए ईरान ने लागू किए नए नियम, अमेरिका के साथ 2 हफ्ते का युद्धविराम शुरू.
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जहाजों की आवाजाही को लेकर एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच 7 अप्रैल 2026 से दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। इस समझौते के बाद ईरान ने जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का फैसला किया है, लेकिन इसके लिए कुछ बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं। अब इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज को ईरान की सेना के साथ तालमेल बिठाना होगा और अपनी पूरी जानकारी साझा करनी होगी।
शिपिंग के लिए नए नियम और टोल शुल्क की जानकारी
ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब जहाजों को केवल तभी रास्ता मिलेगा जब वे ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय करेंगे। ईरान ने इस रास्ते के इस्तेमाल के लिए भारी टोल शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी दिया है।
- जहाजों को अपने कार्गो, मालिक, चालक दल और गंतव्य की पूरी जानकारी देनी होगी।
- ईरान ने प्रति पारगमन 2 मिलियन डॉलर तक का टोल शुल्क प्रस्तावित किया है।
- यह भुगतान चीनी युआन या क्रिप्टोकरेंसी में किया जा सकता है।
- जहाजों को एक गुप्त संकेत (Secret Signal) का उपयोग करना होगा और गैर-शत्रुतापूर्ण झंडे के तहत चलना होगा।
मौजूदा स्थिति और प्रमुख तारीखें
युद्धविराम की घोषणा के बाद भी हॉर्मुज़ में जहाजों की भीड़ काफी ज्यादा है। दुबई और खोर फक्कन के आसपास लगभग 1000 जहाज सुरक्षित रास्ते के इंतजार में खड़े हैं। नीचे दी गई टेबल में इस घटनाक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं:
| महत्वपूर्ण घटना | तारीख / विवरण |
|---|---|
| युद्धविराम की शुरुआत | 7 अप्रैल 2026 |
| इस्लामाबाद में वार्ता शुरू होगी | 10 अप्रैल 2026 |
| फंसे हुए जहाजों की संख्या | 800 से 1000 के बीच |
| सामान्य यातायात की संभावना | 30 अप्रैल 2026 तक (57%) |
| मध्यस्थ देश | पाकिस्तान |
अंतरराष्ट्रीय देशों की प्रतिक्रिया और सुरक्षा
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि पूरा सैन्य पर्यवेक्षण बना रहेगा। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने चिंता जाहिर की है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं रहना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) भी नाविकों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक राजनयिक प्रयासों में जुटा हुआ है। भारत, इराक और मलेशिया जैसे देशों को चुनिंदा रूप से मार्ग की अनुमति दी गई है, जबकि चीन और रूस ने इस मामले में ईरान के पक्ष का समर्थन किया है।




