भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का बड़ा बयान, होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकले LPG से लदे भारतीय जहाज
भारत सरकार ने साफ़ कर दिया है कि देश के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को जानकारी दी कि भारत अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सभी संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में है। इसी बीच राहत की खबर यह है कि रसोई गैस से लदे भारतीय जहाज सुरक्षित तरीके से समुद्री रास्तों को पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों के आने से घरेलू बाजार में ऊर्जा की आपूर्ति बनी रहेगी।
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जहाजों की ताज़ा स्थिति और समुद्री सुरक्षा का अपडेट
भारत के दो महत्वपूर्ण एलपीजी कैरियर, Pine Gas और Jag Vasant ने 23 मार्च 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। ये जहाज करीब 92,612 मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर आ रहे हैं और इनके 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है। इन जहाजों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर है क्योंकि फारस की खाड़ी में वर्तमान में कई अन्य भारतीय जहाज भी मौजूद हैं।
- पाइने गैस पर कुल 33 भारतीय नाविक सवार हैं।
- जग वसंत पर 27 भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
- सरकार जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए नौवहन महानिदेशालय के साथ तालमेल बिठा रही है।
- शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा भी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं।
ऊर्जा जरूरतों को लेकर क्या है भारत की रणनीति?
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत की ऊर्जा खरीद पूरी तरह से बाजार की स्थितियों और देश की जरूरतों पर आधारित है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात चाहे जैसे भी हों, भारतीयों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे जरूरी काम है। इसके लिए भारत किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा मंगवाने पर ध्यान दे रहा है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए खाड़ी देशों में फंसे अन्य जहाजों को भी सुरक्षित निकालने की कोशिशें जारी हैं।
| जहाज का प्रकार | कुल संख्या | मौजूदा स्थिति |
|---|---|---|
| LPG कैरियर | 8 जहाज | फारस की खाड़ी में मौजूद |
| कच्चे तेल के जहाज | 4 जहाज | मूवमेंट ब्लॉक के कारण फंसे |
| LNG टैंकर | 1 जहाज | सुरक्षा निगरानी में |
सरकार फिलहाल खाली जहाजों में गैस लोड करने का काम भी कर रही है ताकि आने वाले दिनों में किसी तरह की किल्लत न हो। एक अन्य जहाज में अगले तीन से चार दिनों के भीतर पूरी गैस लोड होने की उम्मीद जताई गई है।




