ईरान और भारत के बीच हुई उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के बाद एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत के बाद, Strait of Hormuz से गुजरने वाले भारतीय तेल टैंकरों को सुरक्षित रास्ता मिल गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार बातचीत सफल रही है और इसके तुरंत बाद कच्चे तेल का पहला शिपमेंट सुरक्षित रूप से मुंबई पहुंच चुका है। बाकी कई टैंकर भी बिना किसी परेशानी के भारतीय बंदरगाहों की तरफ बढ़ रहे हैं।

भारतीय जहाजों को कैसे मिला सुरक्षित रास्ता?

युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच यह तीसरी बातचीत थी। मौजूदा समय में Strait of Hormuz के आस-पास 28 भारतीय जहाज काम कर रहे हैं, जिनमें ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ नाम के भारतीय तेल टैंकर भी शामिल हैं। ईरान की सेना ने साफ किया है कि उनकी पाबंदियां मुख्य रूप से अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देशों के जहाजों पर हैं। गैर-पश्चिमी देशों के जहाज इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने यह भी बताया है कि भारतीय जहाजों के लिए कोई अलग से विशेष या एक्सक्लूसिव समझौता नहीं हुआ है, बल्कि यह उनकी मौजूदा नीति का ही हिस्सा है।

भारत की तेल सप्लाई पर इसका क्या असर होगा?

भारत अपने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा इसी Strait of Hormuz के जरिए मंगाता है। युद्ध के कारण पैदा हुए हालात को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब 70 प्रतिशत ईंधन आयात को दूसरे रास्तों और नए कॉरिडोर से मंगाया जा रहा है।

भारत ने किसी एक रास्ते पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अब 40 अलग-अलग देशों से कच्चे तेल की खरीदारी शुरू कर दी है। इसका सीधा फायदा यह है कि आम लोगों को तेल की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और सप्लाई चेन सुचारू रूप से चलती रहेगी। मुंबई बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंचे पहले शिपमेंट से यह स्पष्ट हो गया है कि खाड़ी देशों से जुड़े रास्तों पर भारत का व्यापार सुरक्षित है।