Iran Rescue Mission: ईरान ने भारत से 180 नौसैनिकों और श्रीलंका से 84 शवों को सुरक्षित निकाला, कोच्चि में फंसा था जहाज
ईरान ने भारत के कोच्चि में फंसे अपने करीब 180 नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। ये सभी नौसैनिक ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan पर तैनात थे, जो तकनीकी खराबी के बाद भारत में रुका था। इसके साथ ही ईरान ने श्रीलंका से अपने 84 नौसैनिकों के शव भी वापस मंगाए हैं। इन नौसैनिकों की मौत अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले में हुई थी। इस पूरी निकासी प्रक्रिया के लिए ईरान ने एक विशेष चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल किया है।
अमेरिकी हमले में डूबा ईरानी जहाज और भारत में ली शरण
अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में 4 मार्च को अमेरिकी पनडुब्बी USS Charlotte ने ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हमला कर उसे डुबो दिया था। इस घटना में 84 ईरानी नौसैनिकों की जान चली गई। उसी दिन ईरान का एक दूसरा जहाज IRIS Lavan तकनीकी खराबी के चलते भारत के कोच्चि बंदरगाह पहुंच गया। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में यह स्पष्ट किया कि भारत ने पूरी तरह से मानवीय आधार पर इस ईरानी जहाज को रुकने की अनुमति दी है और इसके चालक दल को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई हैं।
विमान ने नौसैनिकों को निकालने के लिए चुना सुरक्षित रास्ता
अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे तनाव के कारण ईरान ने अपने लोगों को निकालने के लिए एक बहुत ही सुरक्षित और लंबा रास्ता चुना। विशेष चार्टर्ड विमान सबसे पहले श्रीलंका के मट्टाला हवाई अड्डे गया और वहां से 84 शवों को लिया। इसके बाद यह विमान कोच्चि पहुंचा और नौसैनिकों को लेकर आगे बढ़ा।
- श्रीलंका से 84 शव लेकर चार्टर्ड फ्लाइट ने कोच्चि के लिए उड़ान भरी।
- कोच्चि से करीब 180 नौसैनिकों को विमान में बिठाया गया।
- यह फ्लाइट भारत के हवाई क्षेत्र से होते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान के ऊपर से गुजरी।
- इसके बाद विमान कैस्पियन सागर पार करके अजरबैजान और आर्मेनिया होते हुए ईरान की सीमा में पहुंचा।
श्रीलंका में भी फंसा है एक ईरानी जहाज
ईरान की नौसेना का एक और सहायक जहाज IRIS Bushehr भी श्रीलंका के त्रिकोंमाली बंदरगाह पर खड़ा है। इसके इंजन में खराबी आ गई थी जिसे ठीक किया जा रहा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भी साफ कर दिया है कि वे इस अंतरराष्ट्रीय युद्ध में तटस्थ हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत मानवीय मदद कर रहे हैं। फिलहाल IRIS Lavan के कुछ तकनीकी कर्मचारी अभी भी कोच्चि में जहाज की मरम्मत के लिए रुके हुए हैं और दोनों देशों के बीच व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर बातचीत जारी है।




