Iran Israel War: ईरान ने इजराइल और सऊदी में अमेरिकी एयरबेस पर दागी मिसाइलें
ईरान की सेना IRGC ने 23 मार्च 2026 को ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के 75वें चरण के तहत एक बड़ा हमला किया है। इस सैन्य कार्रवाई में इजराइली ठिकानों के साथ-साथ सऊदी अरब के अल-खर्ज में स्थित अमेरिकी प्रिंस सुल्तान एयर बेस को भी निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि यह हमला उनके शहीद कमांडरों के सम्मान और इजराइल व अमेरिका की लगातार बढ़ती आक्रामकता के जवाब में किया गया है।
हमले में किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
ईरानी सेना ने इस ऑपरेशन के दौरान उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल के कब्जे वाले इलाकों में तैनात नई सैन्य टुकड़ियों और उनके छिपे हुए ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। इसके साथ ही सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी एयर बेस को निशाना बनाने की वजह यह बताई गई है कि वहां से ईरान के खिलाफ हवाई ऑपरेशन संचालित किए जाते हैं। इजराइली मीडिया के मुताबिक, हमले के तुरंत बाद करीब 59 बस्तियों में खतरे के सायरन बजने लगे।
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस से जुड़े मुख्य आंकड़े
ईरान की इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए भी यह एक चिंता का विषय है क्योंकि सैन्य गतिविधियां बढ़ने से हवाई यातायात और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इस ऑपरेशन के बारे में कुछ मुख्य जानकारियां नीचे दी गई हैं:
| विवरण | मुख्य जानकारी |
|---|---|
| हमले की तारीख | 23 मार्च 2026 |
| हमलावर दल | ईरान (IRGC) |
| मुख्य हथियार | एडवांस्ड बैलिस्टिक मिसाइल |
| प्रभावित क्षेत्र | इजराइल, सीरियाई गोलान और सऊदी अरब (अमेरिकी बेस) |
| सायरन की चेतावनी | 59 इजराइली बस्तियों में अलर्ट |
सैन्य कार्रवाई के पीछे का कारण
ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी खुफिया इकाइयां इजराइल और अमेरिकी सेना पर लगातार नजर रख रही हैं। सेना ने चेतावनी दी है कि सैन्य संपत्तियों को नागरिक क्षेत्रों में छिपाने से भी कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी। यह हमला 22 मार्च को हुए 74वें दौर की कार्रवाई के ठीक एक दिन बाद हुआ है। पिछली कार्रवाई में भी अमेरिका के सेंट्रल कमांड को नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया था। मौजूदा स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है।




