ईरान ने सऊदी अरब में अमेरिकी बेस पर दागी मिसाइलें, गल्फ में काम करने वाले प्रवासियों के लिए जारी हुआ अलर्ट
ईरान की सेना (IRGC) ने सऊदी अरब के अल-खर्ज एयरबेस और गल्फ के अन्य अमेरिकी ठिकानों पर 51वीं बार मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है. इसे ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ का नाम दिया गया है. इस बड़े हमले के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है, जिसका सीधा असर गल्फ देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और कामगारों पर पड़ रहा है.
किन ठिकानों पर हुआ हमला और क्या हुआ नुकसान?
ईरान ने मुख्य रूप से सऊदी अरब के अल-खर्ज में मौजूद प्रिंस सुल्तान एयरबेस को निशाना बनाया है. यह बेस अमेरिकी F-35 और F-16 फाइटर जेट्स का बड़ा केंद्र है. अमेरिकी और क्षेत्रीय रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में 5 अमेरिकी KC-135 रिफ्यूलिंग विमानों को नुकसान पहुंचा है. इस हमले के साथ ही कई अन्य देशों में भी एक साथ हमले किये गए हैं, जिनकी सूची नीचे दी गई है:
- सऊदी अरब: अल-खर्ज एयरबेस
- UAE: अल धफरा एयरबेस और फुजैराह
- बहरीन: जुफैर
- कुवैत: अली अल सलेम एयरबेस
- जॉर्डन: अल अजरक एयरबेस
सऊदी रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उन्होंने 6 बैलिस्टिक मिसाइलों और कई ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर दिया. अमेरिका ने बताया है कि इस हमले में किसी इंसान की जान नहीं गई है.
गल्फ में रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों पर क्या असर होगा?
इन हमलों की वजह से UAE, कतर, बहरीन और कुवैत जैसे गल्फ देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस कुछ समय के लिए बंद कर दिया है. इससे भारत और गल्फ देशों के बीच सफर करने वाले यात्रियों की फ्लाइट्स प्रभावित हो रही हैं. ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी कंपनियों से जुड़े औद्योगिक स्थल और बैंक उनके निशाने पर हैं.
क्षेत्रीय प्रशासन ने आम लोगों और प्रवासियों से कहा है कि वे अमेरिकी आर्थिक केंद्रों और ठिकानों से कम से कम 1 किलोमीटर की दूरी बनाए रखें. जो लोग अमेरिकी कंपनियों या उनके आस-पास काम करते हैं, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
क्या है इस हमले की मुख्य वजह?
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों में उनके नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ था और 154 लोगों की जान गई थी. उसी के जवाब में यह 51वीं बार जवाबी कार्रवाई की गई है. ईरान ने पड़ोसी देशों से अमेरिकी सेना को बाहर निकालने की मांग की है.
वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के शीर्ष नेताओं की जानकारी देने वाले को 10 मिलियन डॉलर का इनाम देने की घोषणा की है. गल्फ देशों में काम करने वाले लोगों को फिलहाल स्थानीय सरकार के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है.




