ईरान ने अमेरिका का शांति प्रस्ताव ठुकराया, बातचीत के लिए रखीं कड़ी शर्तें, युद्ध खत्म करने के लिए मांगा मुआवज़ा.
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक नए मोड़ पर आ गया है. ईरान ने अमेरिका की ओर से मिले 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है. ईरान का कहना है कि वह केवल एक स्थायी समाधान चाहता है और इसके लिए उसने अपनी 10 शर्तें पेश की हैं. यह जानकारी 7 अप्रैल 2026 को सामने आई है जिसमें ईरान ने साफ किया है कि किसी भी अस्थायी युद्धविराम से बात नहीं बनेगी क्योंकि इससे विरोधियों को फिर से इकट्ठा होने का मौका मिलता है.
ईरान ने शांति के लिए कौन सी प्रमुख शर्तें रखी हैं?
ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अपना जवाब भेजा है जिसमें कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं. इन शर्तों को पूरा किए बिना ईरान बातचीत की मेज पर आने को तैयार नहीं है. ईरान का मानना है कि केवल स्थायी शांति ही क्षेत्र में स्थिरता ला सकती है.
- अमेरिका और इसराइल द्वारा किए जा रहे हमलों को तुरंत रोका जाए.
- भविष्य में इस तरह के हमले दोबारा न करने की पक्की गारंटी दी जाए.
- युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए ईरान को पूरा मुआवज़ा दिया जाए.
- Strait of Hormuz पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता दी जाए ताकि वह वहां से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूल सके.
- क्षेत्रीय संघर्षों को खत्म करने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की मांग भी शामिल है.
हालिया हमले और ज़मीनी हकीकत क्या है?
शांति वार्ता की कोशिशों के बीच ईरान के कई ठिकानों पर हमले हुए हैं. अमेरिकी सेना ने ईरान के Kharg Island पर निशाना साधा है. इसके साथ ही काशान में एक रेलवे पुल पर हुए हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 10 सूत्री जवाब को एक बड़ा कदम बताया है लेकिन इसे काफी नहीं माना है. पाकिस्तान इस समय मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों के बीच दस्तावेजों का आदान-प्रदान कर रहा है. खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भी यह तनाव चिंता का विषय है क्योंकि इसका असर तेल की कीमतों और सुरक्षा पर पड़ सकता है.




