ईरान ने फिर दागा, UAE, कुवैत और बहरीन पर ड्रोन अटैक, तेल ठिकानों और अमेरिकी बेस पर मचाया हड़कंप.
5 अप्रैल 2026 को ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी और इसराइली ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। ईरान की सेना IRGC ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और बहरीन में तेल और गैस के कारखानों को निशाना बनाया है। यह हमले ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत किए गए हैं, जिसे ईरान ने अपने हितों पर हुए हमलों का बदला बताया है। इस ताजा घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और कई जगहों पर आग लगने की खबरें हैं।
खाड़ी के किन देशों में क्या नुकसान हुआ?
ईरान के इन हमलों से खाड़ी के कई महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों का सीधा असर वहां काम करने वाले लोगों और उद्योगों पर पड़ा है। ईरान ने साफ कहा है कि अगर उसके नागरिक ठिकानों पर फिर हमला हुआ, तो वह इससे भी बड़े हमले करेगा।
- कुवैत: यहां के शुवाइख तेल क्षेत्र में ड्रोन हमले के बाद भारी नुकसान हुआ है।
- बहरीन: बाबको एनर्जीज के एक स्टोरेज टैंक में भीषण आग लग गई और एक कमर्शियल जहाज को भी निशाना बनाया गया।
- UAE: ईरान ने दावा किया है कि उसने यहां के एल्युमीनियम प्लांट और अमेरिकी रडार सिस्टम पर हमले किए हैं।
- इसराइल: तेल अवीव और ईलात जैसे शहरों को भी मिसाइलों और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया है।
हमलों की मुख्य वजह और ईरान की शर्तें
यह पूरा विवाद 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे। हाल ही में ईरान के बुशहर परमाणु केंद्र के पास हुए हमले के बाद ईरान ने यह जवाबी कार्रवाई की है। ईरान ने शांति बहाली के लिए दुनिया के सामने अपनी कुछ मांगें रखी हैं जिन्हें पूरा करना जरूरी बताया गया है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| हमलों का अंत | ईरान पर होने वाले सभी सैन्य हमले तुरंत रुकने चाहिए। | अब तक हुए नुकसान के लिए ईरान ने पूरे मुआवजे की मांग की है। |
| सुरक्षा गारंटी | भविष्य में दोबारा हमले न होने का भरोसा मांगा गया है। |
| स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ | ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर अपने पूरे अधिकार और सम्मान की बात कही है। |
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वे या तो समझौता करें या फिर गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि तेल ठिकानों पर हमलों से स्थानीय अर्थव्यवस्था और काम-काज पर असर पड़ सकता है।




