ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने पाकिस्तान की मदद से हुए दो हफ्ते के युद्धविराम समझौते को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। इस समझौते को ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई की मंजूरी मिली है, जिन्होंने मार्च में अपने पिता की जगह ली थी। ईरान ने इस डील को अपनी बड़ी जीत बताया है और पाकिस्तान की कोशिशों की सराहना की है। इस फैसले से खाड़ी क्षेत्र में पिछले कई दिनों से चल रहे तनाव और बमबारी में फिलहाल कुछ दिनों के लिए राहत मिल गई है।

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समझौते की मुख्य शर्तें और वर्तमान स्थिति

7 अप्रैल 2026 को हुए इस समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान पर होने वाली बमबारी और हमलों को दो हफ़्तों के लिए टाल दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि यह रोक तभी जारी रहेगी जब ईरान Strait of Hormuz को पूरी तरह और सुरक्षित तरीके से व्यापार के लिए खोल देगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने इस सुलह के लिए लगातार बातचीत की थी। हालांकि, ईरान की सिक्योरिटी काउंसिल का कहना है कि जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा, जिससे आने वाले दिनों में बातचीत में थोड़ी मुश्किल हो सकती है।

ईरान की स्थायी शांति के लिए रखी गई मांगें

ईरान ने केवल दो हफ्ते के युद्धविराम तक सीमित न रहकर एक स्थायी समझौते के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। इन शर्तों में ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना और अमेरिका-इजरायल के हमलों से हुए नुकसान का मुआवजा मांगना शामिल है। इसके अलावा ईरान चाहता है कि अमेरिकी सेना इस पूरे क्षेत्र से वापस चली जाए। पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन से अनुरोध किया था कि वे बातचीत के लिए थोड़ा और समय दें ताकि युद्ध को और ज्यादा बढ़ने से रोका जा सके।

मुख्य बिंदु विवरण
मंजूरी की तारीख 7 अप्रैल 2026
मध्यस्थता पाकिस्तान (PM Shehbaz Sharif)
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump
ईरान के नए लीडर Ayatollah Mojtaba Khamenei
विवादित क्षेत्र Strait of Hormuz