Iran War: ईरान युद्ध के कारण जर्मनी का शेयर बाजार धड़ाम, कच्चा तेल 120 डॉलर के पार पहुंचा
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब पूरी दुनिया के बाजारों पर दिखने लगा है. सोमवार को जर्मन शेयर बाजार खुलते ही भारी गिरावट के साथ ट्रेड करने लगा. मध्य पूर्व में तनाव और ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है. इससे वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा संकट मंडराने लगा है.
शेयर बाजार और कच्चे तेल पर क्या असर हुआ?
युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं:
- जर्मनी का प्रमुख इंडेक्स DAX 3.0 प्रतिशत गिरकर 22,983.67 अंकों पर आ गया.
- यूरो की कीमत भी गिरकर 1.1534 डॉलर पर आ गई.
- कच्चा तेल 30 प्रतिशत उछाल के साथ 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया.
- कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक पर हमले के बाद Boursa Kuwait में ट्रेडिंग रोक दी गई है.
युद्ध के कारण खाड़ी देशों की क्या स्थिति है?
इस युद्ध का खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है. Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही 94 प्रतिशत तक कम हो गई है, जिससे कच्चे तेल का निर्यात लगभग रुक गया है. कुवैत की सरकारी तेल कंपनी ने कच्चे तेल के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी है. समुद्री बीमा कंपनियों ने भी कमर्शियल जहाजों का कवर रद्द कर दिया है, जिससे सप्लाई चेन में बड़ी बाधा आ रही है.
वैश्विक नेताओं ने इस स्थिति पर क्या कहा?
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने अमेरिका में कहा कि यह युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतें अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं. यूरोपियन सेंट्रल बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट फिलिप लेन ने भी महंगाई बढ़ने की चेतावनी दी है. कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने भी माना है कि यह युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्था को नीचे ला सकता है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि युद्ध खत्म होते ही तेल की कीमतें पहले से भी नीचे आ जाएंगी.





