Iraq Oil Crisis: इराक ने तेल क्षेत्रों पर लागू किया Force Majeure, युद्ध के कारण सप्लाई ठप
इराक सरकार ने 20 मार्च 2026 को विदेशी तेल कंपनियों द्वारा संचालित सभी तेल क्षेत्रों पर Force Majeure (अनिवार्य परिस्थिति) घोषित कर दिया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस समुद्री रास्ते के बंद होने से इराक अपना कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में नहीं भेज पा रहा है। इराक के इस फैसले का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और खाड़ी देशों से तेल खरीदने वाले देशों पर पड़ेगा।
इराक ने यह बड़ा फैसला क्यों लिया?
इराक के तेल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए युद्ध की वजह से समुद्री मार्ग अब व्यापार के लिए सुरक्षित नहीं रहे। इराक का तेल उत्पादन पहले ही 43 लाख बैरल से घटकर 13 लाख बैरल प्रति दिन पर आ चुका था। जब कोई देश Force Majeure लागू करता है, तो वह कानूनी रूप से अपने पुराने समझौतों को समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है। समुद्री रास्ता बंद होने के कारण इराक के तेल भंडार पूरी तरह भर चुके हैं और अब नया उत्पादन रखने की जगह नहीं बची है।
खाड़ी देशों में तेल सप्लाई की ताज़ा स्थिति
इराक के अलावा अन्य खाड़ी देशों ने भी सप्लाई को लेकर कड़े कदम उठाए हैं। युद्ध के कारण न केवल तेल बल्कि गैस की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। इस स्थिति से खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
| देश का नाम | ताज़ा अपडेट (मार्च 2026) |
|---|---|
| Iraq | सभी तेल क्षेत्रों पर Force Majeure लागू किया |
| Kuwait | तेल उत्पादन कम किया और Force Majeure लागू किया |
| Qatar | LNG शिपमेंट पर Force Majeure घोषित किया |
| Bahrain | Bapco Energies ने 9 मार्च को घोषणा की |
| USA | सप्लाई चेन सुधारने के लिए Jones Act में ढील दी |
युद्ध की गंभीरता को देखते हुए NATO ने इराक में मौजूद अपने सभी कर्मियों को यूरोप वापस बुला लिया है। वहीं ब्रिटेन ने भी अमेरिकी सेना को ईरानी मिसाइल ठिकानों पर हमला करने के लिए अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इन हालातों में आने वाले दिनों में तेल बाज़ार में भारी अस्थिरता देखने को मिल सकती है।




