सऊदी, UAE और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की UN में निंदा, जॉर्डन ने बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
जॉर्डन ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सामने ईरान की सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है। राजदूत अकरम अल-हराशा ने परिषद को बताया कि ईरान द्वारा जॉर्डन और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों पर किए गए हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इन हमलों में अब तक सैकड़ों मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और संप्रभुता को सीधा खतरा पैदा हो गया है।
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ईरान के हमलों और अब तक की कार्रवाई से जुड़ी अहम जानकारी
- हमलों की शुरुआत: ईरान ने 28 फरवरी 2026 से जॉर्डन और GCC देशों को निशाना बनाना शुरू किया था।
- मिसाइलों की संख्या: जॉर्डन की सेना ने अब तक अपनी सीमा में आने वाली 240 से ज्यादा ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराया है।
- प्रभावित देश: इन हमलों में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को निशाना बनाया गया है।
- UN का प्रस्ताव: 11 मार्च 2026 को सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2817 अपनाकर इन हमलों की कड़ी निंदा की और इसे शांति के लिए खतरा बताया।
- UAE का रुख: UAE ने साफ कर दिया है कि नागरिकों और नागरिक सुविधाओं पर हमले किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं हैं।
- ओमान की एकजुटता: ओमान ने भी 25 मार्च को खाड़ी देशों और जॉर्डन के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया है।
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और सुरक्षा पर इसका असर
UAE, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं। इस तरह के सैन्य तनाव से वहां रहने वाले लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है। हालांकि, जॉर्डन और GCC देशों ने साफ किया है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के हकदार हैं। जॉर्डन की सेना सक्रिय रूप से मिसाइलों को रोक रही है ताकि आम जनता को कोई नुकसान न हो।
UAE के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश ने कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए स्थितियों पर पूरी स्पष्टता जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र में बहरीन के मिशन ने भी महासचिव को पत्र लिखकर इन हमलों की जानकारी दी है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए जरूरी है कि वे स्थानीय दूतावास और सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।




