कुवैत में नेशनल डे और लिबरेशन डे के जश्न के बीच वहां के अमीर, हिज हाईनेस शेख मिशाल अल-अहमद अल-जाबेर अल-सबा ने एक बड़ा मानवीय फैसला लिया है। 25 फरवरी 2026 को जारी हुए अमीरी डिक्री नंबर 21 के तहत कुल 539 कैदियों को माफी दी गई है। यह कदम उन परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जिनके अपने जेल में बंद थे। गृह मंत्रालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रिहाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि लोग त्योहार अपने घर पर मना सकें।

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किन कैदियों को मिली है माफी और क्या हैं शर्तें?

इस माफी प्रक्रिया को दो मुख्य भागों में बांटा गया है। कुछ कैदियों को तुरंत रिहा कर दिया गया है, जबकि कुछ की बची हुई सजा की अवधि कम कर दी गई है। इस फैसले के लिए एक विशेष कमेटी ने करीब 3,000 फाइलों की जांच की थी, जिनमें से 539 लोगों को इसके लिए चुना गया।

  • माफी पाने वालों को तय शर्तों और नियमों को पूरा करना जरूरी था।
  • आम तौर पर राज्य की सुरक्षा, धर्म का अपमान या गंभीर अपराधों से जुड़े कैदी इस लिस्ट से बाहर रखे जाते हैं।
  • कुछ मामलों में कैदियों पर लगे कोर्ट के जुर्माने भी माफ किए गए हैं।

रिहाई की प्रक्रिया और गृह मंत्रालय की तैयारी

गृह मंत्रालय (Ministry of Interior) के विशेष सुरक्षा और सुधार संस्था विभाग ने बताया कि रिहाई का काम बिना किसी देरी के शुरू कर दिया गया है। 25 और 26 फरवरी के बीच प्रशासनिक और कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करके कैदियों को जेल से बाहर निकाला जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले का मकसद लोगों को अपनी गलती सुधारने और समाज में दोबारा एक अच्छी जिंदगी शुरू करने का मौका देना है। कई मामलों में ज्यूडिशियल डिपोर्टेशन यानी देश से निकाले जाने के आदेश को भी रद्द किया गया है, जिससे वहां रह रहे प्रवासियों को भी राहत मिली है। यह कुवैत की एक पुरानी परंपरा है जहां राष्ट्रीय त्योहारों पर अमीर द्वारा कैदियों को माफी दी जाती है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.