Kuwait Drone Attack: कुवैत पर ईरान का ड्रोन हमला, तेल और बिजली स्टेशनों को पहुँचा भारी नुकसान, सरकार ने जताया कड़ा विरोध
कुवैत में 9 अप्रैल की शाम को ईरान और उसके समर्थित समूहों ने ड्रोन के ज़रिए कई ज़रूरी ठिकानों पर हमला किया. इस हमले ने सबको चौंका दिया क्योंकि यह अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते के ठीक एक दिन बाद हुआ. कुवैत सरकार ने इसे अपनी सरजमीं और संप्रभुता का बड़ा उल्लंघन बताया है.
हमले में कितना नुकसान हुआ और किन जगहों को निशाना बनाया गया?
कुवैत के रक्षा और आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि यह हमले दक्षिणी क्षेत्र में हुए. ईरान के ड्रोन ने तेल के ठिकानों, तीन पावर स्टेशनों और पानी साफ करने वाले प्लांट (desalination plants) पर हमला किया. ब्रिगेडियर जनरल नासिर बुस्लीब और कर्नल सऊद अब्दुलअजीज अल-अत्वान ने पुष्टि की कि इन हमलों से काफी ज़्यादा भौतिक नुकसान हुआ है. कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को रोकने के लिए पूरी ताक़त लगा दी थी.
कुवैत सरकार का क्या जवाब है और अंतरराष्ट्रीय नियम क्या कहते हैं?
विदेश मंत्रालय ने 10 अप्रैल को एक बयान जारी कर इन हमलों की कड़ी निंदा की. सरकार ने कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है. कुवैत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा के अधिकार (Article 51) का इस्तेमाल करेगा. सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 2817 (2026) का हवाला देते हुए सभी दुश्मनी वाली हरकतों को तुरंत रोकने की मांग की है.
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| हमले की तारीख़ | 9 अप्रैल 2026 |
| निंदा का बयान | 10 अप्रैल 2026 |
| निशाना बने ठिकाने | तेल रिफाइनरी, पावर स्टेशन, वॉटर प्लांट |
| हमलावर | ईरान और उसके सहयोगी मिलिशिया |
| युद्धविराम समझौता | 8 अप्रैल 2026 (अमेरिका और ईरान के बीच) |




