लेबनान में इसराइल के हमलों से भारी नुकसान, 22 प्रतिशत खेती वाली ज़मीन हुई बर्बाद, खाद्य संकट का खतरा बढ़ा.
लेबनान में जारी इसराइली हमलों की वजह से देश की खाद्य सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश की करीब 22 प्रतिशत खेती वाली ज़मीन इन हमलों में खराब हो चुकी है। लेबनान के कृषि मंत्रालय ने बताया है कि दक्षिण लेबनान के इलाकों में हालात बहुत खराब हैं और वहां रहने वाले ज़्यादातर किसानों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा है। इससे आने वाले समय में खाने-पीने की चीज़ों की भारी कमी होने की आशंका है।
खेती और पशुपालन पर कितना असर पड़ा?
हमलों की वजह से लगभग 46,479 हेक्टेयर खेती योग्य ज़मीन बर्बाद हुई है। इसमें फलों के बाग, जैतून के पेड़ और ग्रीनहाउस खेती को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचा है। दक्षिण लेबनान और नबातियेह जैसे अहम कृषि क्षेत्रों में उत्पादन पूरी तरह से रुक गया है। कृषि मंत्री निज़ार हानी ने बताया है कि प्रभावित इलाकों के करीब 80 प्रतिशत किसानों को वहां से हटना पड़ा है। पशुपालन के क्षेत्र में भी काफी नुकसान हुआ है जिसका विवरण नीचे दिया गया है:
- करीब 49 प्रतिशत मधुमक्खी के छत्ते नष्ट हो गए हैं।
- मछलियों की आबादी में 39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
- गाय, भेड़ और मुर्गियों के पालन पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है।
- खेती के काम में लगे 76.6 प्रतिशत मजदूर अब वहां से पलायन कर चुके हैं।
सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं क्या कर रही हैं?
लेबनान के कृषि मंत्रालय ने किसानों की मदद के लिए एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्लान शुरू किया है। इस योजना के तहत प्रभावित किसानों को सिंचाई के लिए पानी, ईंधन, जानवरों के लिए चारा और वेटरनरी केयर मुहैया कराई जा रही है। साथ ही तैयार फसल को सुरक्षित बाज़ारों तक पहुँचाने में भी मदद की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था WFP ने साल 2026 में करीब 25 लाख लोगों को खाना पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल मौतों की संख्या | 1,142 से ज़्यादा |
| घायलों की संख्या | 3,315 |
| विस्थापित लोग | 10 लाख से ज़्यादा |
| प्रभावित कृषि भूमि | 46,479 हेक्टेयर |
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मार्च 2026 से जारी इस टकराव में अब तक हज़ारों लोग हताहत हुए हैं। इसराइल की ओर से लिटानी नदी तक सुरक्षा घेरा बनाने की बात कही जा रही है, जिससे मानवीय संकट और गहरा सकता है। लेबनानी सेना और UNIFIL की टीमें जानवरों और मधुमक्खियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में मदद कर रही हैं ताकि बचे हुए संसाधनों को बचाया जा सके।




