समुंदर में नौकरी करने वालों के लिए बड़ी खबर, 112 देशों ने बदला नियम, अब मिलेगी ये खास सुविधा
जिनेवा में International Labour Organisation (ILO) और International Maritime Organisation (IMO) ने मिलकर एक बड़ा ऐलान किया है। 23 फरवरी 2026 को Maritime Labour Convention (MLC) के 20 साल पूरे हो गए हैं। यह समझौता उन लाखों लोगों के लिए जीवनरेखा है जो समुंदर के बीच जहाजों पर महीनों तक काम करते हैं। इस मौके पर दुनिया के बड़े अधिकारियों ने सीफेरेर्स (Seafarers) यानी नाविकों के लिए काम की परिस्थितियों को और बेहतर बनाने का वादा किया है।
क्या है यह समझौता और वर्कर को क्या मिलता है फायदा
इस समझौते को ‘Seafarers’ Bill of Rights’ भी कहा जाता है। इसका मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि जहाज पर काम करने वाले किसी भी कर्मचारी के साथ भेदभाव न हो। इसके तहत काम के घंटे, सही वेतन, अच्छा खाना और रहने की साफ-सुथरी जगह मिलना जरूरी है। दुनिया के 112 देशों ने इसे मान लिया है, जिसका मतलब है कि दुनिया के 96% से ज्यादा बड़े जहाज अब इन नियमों के दायरे में आते हैं। यह नियम भारतीय नाविकों और गल्फ में काम करने वाले सीफेरेर्स के लिए बहुत मददगार साबित हुआ है।
दिसंबर 2027 से लागू होंगे ये नए नियम
इस बैठक में नए संशोधनों के बारे में भी जानकारी दी गई है जो 23 दिसंबर 2027 से लागू होने वाले हैं। इनके तहत अब जहाज पर काम करने वालों को ‘Key Workers’ का दर्जा दिया जाना जरूरी होगा। इसके अलावा, अगर किसी नाविक को बीच में घर लौटना पड़े (Repatriation), तो उसके खर्चे और 30 किलो तक सामान ले जाने की सुविधा को स्पष्ट किया गया है। साथ ही, ‘Shore leave’ यानी बंदरगाह पर उतरने की छुट्टी को बिना किसी भेदभाव के देना अनिवार्य होगा।




