• About
  • Career
  • Contact
  • Team
  • Policies
  • Privacy Policy
  • Correction Policies
  • Fact-Checking Policy
  • Newsletter
सोमवार, जनवरी 19, 2026
GulfHindi
  • Login
  • India
  • UAE
  • Saudi
  • Qatar
  • Kuwait
  • Bahrain
  • Oman
  • Yemen
  • Automotive
  • Finance
  • World
No Result
View All Result
GulfHindi
  • India
  • UAE
  • Saudi
  • Qatar
  • Kuwait
  • Bahrain
  • Oman
  • Yemen
  • Automotive
  • Finance
  • World
GulfHindi
No Result
View All Result
  • India
  • UAE
  • Saudi
  • Kuwait
  • Bahrain
  • Qatar
  • Oman
  • Finance
  • Automotive
  • World
  • Yemen
Home India

संसद में आ रहा है नया बिजली कानून: जानिए विद्युत वितरण कंपनियों और उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर

GulfHindi Desk by GulfHindi Desk
जनवरी 19, 2026
in India
0
0
SHARES
4
VIEWS

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने हाल ही में घोषणा की है कि बिजली संशोधन विधेयक जल्द ही संसद के आगामी बजट सत्र में पेश किया जाएगा। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश के विद्युत क्षेत्र में सुधार लाना और घाटे में चल रही बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को लाभदायक बनाना है। वित्तीय वर्ष 2025 में, विद्युत वितरण कंपनियों ने संयुक्त रूप से 2,701 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया है, जो कई वर्षों के घाटे के बाद एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, मंत्रालय के अनुसार, अभी भी लगभग 50 डिस्कॉम घाटे में चल रही हैं। सरकार राज्य प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा के लिए एक परामर्श बैठक भी आयोजित कर रही है।

यह विधेयक क्यों लाया जा रहा है?

यह विधेयक मुख्य रूप से बिजली क्षेत्र में संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान करने और वितरण कंपनियों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए लाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि वितरण कंपनियां नुकसान का सामना न करें और उन्हें समय पर भुगतान मिल सके। इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य संघ के संतुलन को बनाए रखना, सहयोगात्मक शासन को बढ़ावा देना, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और बिजली क्षेत्र की दक्षता में सुधार करना भी है। यह विधेयक वित्तीय अनुशासन के माध्यम से बिजली वितरण क्षेत्र को मजबूत करेगा और बिजली क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करेगा।

प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक में कौन से प्रमुख बदलाव हैं?

इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित हैं:


  • वितरण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा: यह विधेयक खुदरा बिजली आपूर्ति में प्रतिस्पर्धा लाने के लिए वितरण उप-लाइसेंसिंग का प्रस्ताव करता है। इसका मतलब है कि एक ही क्षेत्र में कई कंपनियां एक साझा वितरण नेटवर्क का उपयोग कर सकेंगी, जिससे सेवा की गुणवत्ता में सुधार और वितरण घाटे में कमी आने की उम्मीद है।
  • वित्तीय अनुशासन और सब्सिडी में सुधार: इसका लक्ष्य राज्य के स्वामित्व वाली वितरण कंपनियों के घाटे को कम करना और राज्यों पर सब्सिडी के बोझ को घटाना है। विधेयक में क्रॉस-सब्सिडी में चरणबद्ध कमी का प्रस्ताव है, और सब्सिडी को उपभोक्ताओं को सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से अधिक पारदर्शिता से पहुंचाया जाएगा। विनिर्माण उद्यमों, रेलवे और मेट्रो रेलवे द्वारा भुगतान की जाने वाली क्रॉस-सब्सिडी को पांच साल के भीतर पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य है।
  • नियामक ढांचे को मजबूत करना: यह विधेयक राज्य विद्युत नियामक आयोगों को टैरिफ निर्धारण में अधिक स्वायत्तता देकर उन्हें मजबूत बनाना चाहता है और इस प्रक्रिया में वितरण कंपनियों की भूमिका को कम करेगा। साथ ही, बिजली खरीद के लिए सख्त समय-सीमा और अनुबंधित अनुशासन लागू किया जाएगा।
  • नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य: इसमें नवीकरणीय खरीद दायित्वों (RPO) का विस्तार किया जाएगा ताकि गैर-जीवाश्म स्रोतों को भी शामिल किया जा सके। गैर-अनुपालन के लिए प्रति यूनिट 35 पैसे से 45 पैसे तक के जुर्माने का भी प्रस्ताव है।

इस विधेयक पर क्या आपत्तियां उठाई गई हैं?

सरकार द्वारा इस अधिनियम में संशोधन लाने के प्रयासों को विभिन्न वर्गों से आलोचना का सामना भी करना पड़ा है। अखिल भारतीय विद्युत अभियंता महासंघ (AIPEF) ने इस विधेयक का विरोध किया है। उनका तर्क है कि विधेयक सरकारी वितरण कंपनियों के मौजूदा नेटवर्क का उपयोग करने के लिए कई वितरण लाइसेंसधारियों का प्रस्ताव करता है। AIPEF के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा, “यह विधेयक निजीकरण के मकसद का समर्थन करता प्रतीत होता है। केंद्र सरकार बिजली (संशोधन) नियमों के माध्यम से अपने निजीकरण एजेंडे को आगे बढ़ाना जारी रखे हुए है।”

अस्वीकरण: यह लेख वित्तीय बाजारों, नीतियों और निवेश निर्णयों से संबंधित जानकारी प्रदान करता है। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञों से सलाह लेने की सलाह दी जाती है।

Last Updated: 19 January 2026

ShareTweetSendShare
Previous Post

भारत लौटे अनिवासी भारतीय: पहले साल के टैक्स नियम और अनुपालन की पूरी जानकारी

GulfHindi Desk

GulfHindi Desk

Serving Arab, India Live News Updates since 2018. You can share your feedback, requests on [email protected]

Related Posts

India

भारत लौटे अनिवासी भारतीय: पहले साल के टैक्स नियम और अनुपालन की पूरी जानकारी

by GulfHindi Desk
जनवरी 19, 2026
0

भारत लौटने वाले अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए पहला साल टैक्स के लिहाज़ से काफी जटिल हो सकता है। आवासीय स्थिति में बदलाव, विदेशी आय पर कराधान,...

Read moreDetails

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) IMPS लेनदेन शुल्क: 15 फरवरी 2026 से लागू होंगे नए नियम

जनवरी 19, 2026

अमेरिकी वीज़ा बॉन्ड नियम: 21 जनवरी 2026 से दुनिया भर के बांग्लादेशी नागरिकों पर B1/B2 वीज़ा हेतु लागू होगा नया प्रावधान

जनवरी 19, 2026

सऊदी अरब में अवैध प्रवासियों पर बड़ी कार्रवाई: एक सप्ताह में 18,000 से अधिक गिरफ्तार

जनवरी 19, 2026
Please login to join discussion
Facebook Twitter LinkedIn Youtube Whatsapp

Welcome to GulfHindi.com

GulfHindi.com Started in Year 2014 as online community converted into website by year 2019. We are thankful to our reader and their engagement with us. We server general purpose day to day helpful contents in news, finance, automotive and expats related issues or updates inside and outside India.

Gulfhindi.com

About Us.

  • About
  • Career
  • Contact
  • Correction Policies
  • Fact-Checking Policy
  • Privacy Policy
  • Team

Contact Us

GulfHindi, Anand villa 201, DPS more, Priyadarshi Nagar, Patna, Bihar, India 801503
Email: [email protected]
Mobile: 9504756906

© 2025 GulfHindi.com | RR Sanchar Nagar, T6/301, 801105, Danapur, Patna, Bihar | Email: [email protected] | Mob: 9504756906

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • India
  • UAE
  • Saudi
  • Qatar
  • Kuwait
  • Bahrain
  • Oman
  • Yemen
  • Automotive
  • Finance
  • World

© 2025 GulfHindi.com | RR Sanchar Nagar, T6/301, 801105, Danapur, Patna, Bihar | Email: [email protected] | Mob: 9504756906