भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों के लिए नए टैक्स नियम बनाए हैं जो विदेश में काम करते हैं, खास तौर पर UAE और सऊदी अरब में। इनकम टैक्स बिल 2025 के तहत, 1 अप्रैल 2026 से कई बदलाव लागू होंगे। इन बदलावों से उन्हें टैक्स में छूट मिलेगी, लेकिन कुछ नई शर्तें भी होंगी जो उनकी आय पर असर डाल सकती हैं।
60 दिन वाले नियम का क्या मतलब है?
आमतौर पर, अगर कोई भारतीय एक टैक्स साल में 60 दिन से ज़्यादा भारत में रहता है तो वह निवासी (Resident) माना जा सकता है। लेकिन विदेश में काम करने वाले भारतीय नागरिकों (जैसे UAE या सऊदी में) पर यह नियम लागू नहीं होगा। वे 60 दिन से ज़्यादा भारत में रहने के बावजूद नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRI) ही रहेंगे, बशर्ते उन्होंने पिछले चार सालों में भारत में 365 दिन से ज़्यादा बिताए हों।
ज़्यादा कमाई वाले NRI के लिए क्या खास नियम हैं?
अगर किसी NRI या PIO की भारतीय आय 1.5 मिलियन INR (लगभग 17,214 US डॉलर) या इससे ज़्यादा है, तो उन पर 120 दिन का नियम लागू होगा। अगर वे एक टैक्स साल में 120 दिन या उससे ज़्यादा भारत में रहते हैं और पिछले चार सालों में 365 दिन से ज़्यादा भारत में बिता चुके हैं, तो उन्हें ‘रेजिडेंट बट नॉट ऑर्डिनरीली रेजिडेंट’ (RNOR) का दर्जा मिल सकता है।
“डीम्ड रेजिडेंसी” का क्या मतलब है?
यह नियम उन भारतीय नागरिकों पर लागू होगा जिनकी भारतीय आय 1.5 मिलियन INR (लगभग 17,214 US डॉलर) या इससे ज़्यादा है और वे किसी और देश में टैक्स नहीं देते हैं (जैसे टैक्स-फ्री UAE या सऊदी में)। ऐसे मामलों में, भले ही वे भारत न आएं, उनकी पूरी दुनिया की आय पर भारत में टैक्स लग सकता है।
क्या विदेशी कमाई पर भारत में टैक्स लगेगा?
अगर कोई भारतीय विदेश में नौकरी कर रहा है (जैसे UAE या सऊदी में) और उसका बिज़नेस या पेशा भारत के बाहर से ही नियंत्रित होता है, तो उसकी विदेशी आय पर भारत में टैक्स नहीं लगेगा। RNOR का दर्जा होने पर यह इनकम भारत में टैक्सेबल नहीं होती है।
UAE में अब कितना पर्सनल इनकम टैक्स लगेगा?
UAE में 1 जनवरी 2026 से 5% पर्सनल इनकम टैक्स लागू हो रहा है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल 2 जनवरी 2026 से खुलेंगे। इस नए टैक्स से UAE में रहने वाले भारतीय प्रवासियों पर खर्च बढ़ सकता है, साथ ही एमिरेट्स के अतिरिक्त शुल्क भी लग सकते हैं। सऊदी अरब के लिए अभी कोई खास नए नियम नहीं आए हैं।
विदेशी टैक्स चुकाने पर क्या छूट मिलेगी?
जो भारतीय निवासी विदेशों में टैक्स देते हैं, उन्हें दोहरी टैक्स प्रणाली से बचने के लिए भारत में उस टैक्स के बराबर क्रेडिट मिल सकता है। यह उन मामलों में लागू होता है जहां उनकी आय पर भारत और किसी अन्य देश दोनों जगह टैक्स लगता है।




