ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव की वजह से आने वाले दिनों में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि US-Israel और Iran के बीच चल रहे युद्ध और अनिश्चितता के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। हाल ही में ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई इलाकों में हमले तेज कर दिए हैं। इससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और तेल आयात करने वाले देशों की चिंता बढ़ गई है।

ईरान और अमेरिका के बीच क्या है मौजूदा स्थिति?

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार युद्ध खत्म करने के लिए किसी भी तरह की बातचीत नहीं कर रही है और न ही ऐसी कोई योजना है। दूसरी ओर, अमेरिका के White House की प्रेस सचिव Karoline Leavitt का कहना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। इस बीच, इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर हवाई हमले किए हैं और लेबनान में 30 किमी का सुरक्षा क्षेत्र बनाने की घोषणा की है। इस तनाव की वजह से Strait of Hormuz के बंद होने का खतरा बढ़ गया है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल की सप्लाई पाता है।

महत्वपूर्ण घटनाक्रम और देशों पर पड़ने वाला असर

युद्ध की वजह से तेल की कीमतों और सुरक्षा को लेकर कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नीचे दी गई टेबल में पिछले 24 घंटों के मुख्य अपडेट्स देख सकते हैं:

क्षेत्र या देश मुख्य घटनाक्रम
Kuwait कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमले के बाद आग लगने की खबर आई।
Iran अमेरिका के 15-पॉइंट शांति प्रस्ताव को ‘अव्यावहारिक’ बताकर ठुकराया।
Israel इजरायल ने कहा कि वह परमाणु और मिसाइल क्षमता खत्म होने तक हमला जारी रखेगा।
USA मिडिल ईस्ट में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की पुष्टि हुई।
Philippines तेल संकट से निपटने के लिए 20 अरब पेसो का इमरजेंसी फंड एक्टिवेट किया।
Strait of Hormuz ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने के लिए कानून बना रहा है।

Kpler के सीनियर एनालिस्ट Muyu Xu का मानना है कि जब तक युद्ध को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक तेल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद कम है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उड़ानों के किराए और सामानों की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। जर्मनी ने भी इस युद्ध को आर्थिक तबाही करार देते हुए तुरंत युद्धविराम की मांग की है।