पाकिस्तान के विदेश मंत्री का बड़ा बयान, मिडल ईस्ट में युद्ध रोकने के लिए की सऊदी और ईरान से खास बातचीत.
मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने बड़ी पहल की है। उन्होंने सऊदी अरब, ईरान और जापान के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की और युद्ध को कम करने पर ज़ोर दिया। पाकिस्तान का कहना है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए सभी देशों को कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए जिससे आम लोगों को राहत मिल सके।
किन देशों के साथ हुई पाकिस्तान की अहम बातचीत?
6 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने जापानी विदेश मंत्री Toshimitsu Motegi के साथ फोन पर बात की और तनाव कम करने की अपील की। इससे पहले उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से भी संपर्क साधा। पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में शांति के लिए एक मध्यस्थ के रूप में काम करना चाहता है। बातचीत के दौरान इन मुख्य बिंदुओं पर चर्चा हुई:
- सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गहरा तालमेल।
- ईरान से बातचीत के जरिए मसले सुलझाने की अपील।
- जापान के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति के प्रयास।
- मिडल ईस्ट में स्थिरता लाने के लिए साझा कूटनीतिक कोशिशें।
शांति बहाली के लिए पाकिस्तान और चीन का खास प्लान
पाकिस्तान और चीन ने मिलकर फारस की खाड़ी और मध्य पूर्व के लिए एक पांच सूत्रीय शांति पहल का प्रस्ताव रखा है। इसमें युद्ध को तुरंत रोकने और बातचीत शुरू करने पर जोर दिया गया है। फिलहाल मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की के मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान को 45 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव भेजा है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान हुई कूटनीतिक हलचल का विवरण नीचे टेबल में दिया गया है।
| तारीख | देश | बातचीत का विषय |
|---|---|---|
| 6 अप्रैल 2026 | जापान | उग्रता कम करने और शांति के लिए सहयोग |
| 5 अप्रैल 2026 | सऊदी अरब | मिडल ईस्ट में स्थिरता और शांति पर चर्चा |
| 4 अप्रैल 2026 | ईरान | बातचीत और कूटनीति से मसले हल करने पर जोर |
| 3 अप्रैल 2026 | सऊदी अरब | क्षेत्रीय स्थिति और सुरक्षा की समीक्षा |
सऊदी अरब ने भी अपनी सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए हैं और मार्च से अब तक कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किया है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच 2025 में हुआ रक्षा समझौता भी इस समय काफी अहम माना जा रहा है। पाकिस्तान की कोशिश है कि इस तनाव का असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापार पर न पड़े।




