अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. पोप लियो 14वें ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान की सख्त शब्दों में निंदा की है, जिसमें उन्होंने ईरान की सभ्यता को खत्म करने की चेतावनी दी थी. पोप ने इसे पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है और दोनों देशों से शांति की अपील की है. यह बयान उस समय आया है जब ट्रंप ने ईरान को हमले की नई समय सीमा दी है.

ट्रंप ने ईरान को क्या धमकी दी और क्या है उनकी शर्त

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के लिए एक डेडलाइन तय की है. उन्होंने कहा है कि अगर मंगलवार रात 8 बजे तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमला किया जाएगा. ट्रंप ने इसे अपनी योजना में ब्रिज डे का नाम दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है.

युद्ध में अब तक कितना हुआ है नुकसान

ईरान और इसराइल-अमेरिका के बीच यह युद्ध पिछले 38 दिनों से जारी है. इस दौरान बड़ी संख्या में आम लोग मारे गए हैं और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. युद्ध के ताज़ा आंकड़ों को नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:

विवरण जानकारी
युद्ध का समय 38 दिन (6 अप्रैल तक)
ईरान में कुल मौतें 2,076 लोग
घायलों की संख्या 26,000 से अधिक
निशाने पर जगह यूनिवर्सिटी, अस्पताल और रिसर्च सेंटर
अल्टीमेटम की तारीख 7 अप्रैल 2026

पोप लियो ने अमेरिका के लोगों से भी अपील की है कि वे अपने राजनीतिक नेताओं और कांग्रेस प्रतिनिधियों से संपर्क करें. उन्होंने मांग की है कि युद्ध के रास्ते को छोड़कर शांति का रास्ता अपनाया जाए. पोप ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश की सभ्यता को खत्म करने की धमकी देना पूरी तरह गलत है. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की वजह से खाड़ी देशों से होने वाले तेल के व्यापार पर बुरा असर पड़ा है और दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं.