भारतीय रेलवे अपने करोड़ों यात्रियों के सफर को सुहाना, सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए एक व्यापक बदलाव की ओर बढ़ रहा है। रेल मंत्रालय ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है, जिसके तहत वर्ष 2026 में हर हफ्ते रेलवे में एक नया और बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि यह केवल घोषणाएं नहीं होंगी, बल्कि इनका सीधा लाभ यात्रियों को जमीन पर दिखाई देगा। इस महायोजना का उद्देश्य रेलवे की पूरी कार्यप्रणाली को बदलकर यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है।
साल के 52 हफ्तों के लिए तय किया गया 52 बड़े सुधारों का लक्ष्य, अधिकारियों को सख्त निर्देश कि बदलाव सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर यात्रियों को महसूस हों
आने वाले वर्ष के लिए रेलवे ने एक अनूठा रोडमैप तैयार किया है जिसे ’52 हफ्ते, 52 सुधार’ का नाम दिया जा सकता है। इसका अर्थ है कि पूरे साल हर सप्ताह एक नई योजना या सुधार लागू किया जाएगा। रेल मंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक में अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि सुधारों को लागू करने में कोई ढिलाई न बरती जाए। प्रशासन का पूरा जोर इस बात पर है कि नीतियों का असर फाइलों में दबने के बजाय स्टेशनों और ट्रेनों में सफर कर रहे आम आदमी की सुविधा में झलकना चाहिए।
यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए डिजिटल सिग्नलिंग पर जोर, हादसों के आंकड़ों में भारी कमी लाने के लिए आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल
रेलवे के लिए यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है और इसे सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी स्तर पर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2014-15 में रेल दुर्घटनाओं की संख्या 135 थी, जो अब घटकर काफी कम हो गई है और 2025-26 तक इसे और नीचे लाने का लक्ष्य है। मानवीय भूलों को कम करने और ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन के लिए सिग्नल सिस्टम को पूरी तरह से अपग्रेड किया जा रहा है। इसी कड़ी में 10 हजार किलोमीटर से अधिक रेल नेटवर्क पर अत्याधुनिक डिजिटल सिग्नलिंग का काम युद्धस्तर पर जारी है, जिससे सफर को जोखिम मुक्त बनाया जा सके।
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए नई रेल लाइनों और कोच निर्माण की गति बढ़ेगी, ताकि यात्रियों को भीड़भाड़ से मिल सके राहत और ट्रेनें चलें समय पर
सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि रेलवे अपनी क्षमता विस्तार पर भी पूरा फोकस कर रहा है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नई रेल लाइनों का विस्तार, नए कोचों का निर्माण और पुराने ट्रैकों के अपग्रेडेशन की गति को तेज किया जाएगा। इस ढांचागत मजबूती का सीधा फायदा यह होगा कि ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी और त्योहारों या छुट्टियों के दौरान स्टेशनों पर होने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। क्षमता विस्तार से अधिक ट्रेनें चलाई जा सकेंगी, जिससे वेटिंग लिस्ट की समस्या से भी धीरे-धीरे निजात मिल सकेगी।
सफर के दौरान खान-पान की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर विशेष निगरानी, यात्रियों को घर जैसा शुद्ध और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए कसी जाएगी नकेल
लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए खान-पान एक बड़ी समस्या रही है, जिस पर अब रेलवे ने गंभीरता दिखाई है। स्टेशनों और ट्रेनों में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। साफ-सफाई के मानकों को और ऊंचा किया जाएगा और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा ताकि वेंडर्स किसी भी तरह की लापरवाही न कर सकें। रेलवे का प्रयास है कि यात्रियों को सफर के दौरान हाइजीनिक, स्वादिष्ट और सेहतमंद खाना मिले, जिससे उनकी यात्रा का अनुभव और भी बेहतर हो सके। यह सुधार केवल प्रशासनिक नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय रेलवे को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने की एक दूरदर्शी कवायद है।





