Rajnath Singh का बड़ा बयान, West Asia के हालात को बताया ‘बेहद असामान्य’, सप्लाई चेन पर जताई चिंता
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोलकाता में ‘सागर संकल्प मैरीटाइम कॉन्क्लेव’ को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने मौजूदा हालात को ‘बेहद असामान्य’ बताया है और कहा कि भू-राजनीतिक अस्थिरता अब एक नई सामान्य बात होती जा रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया भर में सप्लाई चेन की रुकावटों से बचने का एकमात्र रास्ता ‘आत्मनिर्भरता’ ही है।
पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई चेन पर असर
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि West Asia में चल रहे संघर्ष के कारण ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी सेक्टर पर गहरा असर पड़ा है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) का जिक्र करते हुए कहा कि ये इलाके व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
इन क्षेत्रों में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है। भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार 700 बिलियन डॉलर से अधिक है, लेकिन दुनिया में चल रही इस उथल-पुथल से निपटने के लिए सावधानी बहुत जरूरी है।
2047 तक शिपबिल्डिंग में भारत का बड़ा लक्ष्य
इस चुनौतियों के बीच राजनाथ सिंह ने भारत के लिए एक बड़ा लक्ष्य भी तय किया है। उन्होंने पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को मिलकर काम करने को कहा है ताकि भारत को एक ग्लोबल मैरीटाइम लीडर बनाया जा सके। इसके लिए दो मुख्य पड़ाव तय किए गए हैं:
- 2030 तक: भारत को दुनिया के टॉप 10 जहाज निर्माता देशों (Shipbuilding Nations) में शामिल करना।
- 2047 तक: भारत को दुनिया के टॉप 5 जहाज निर्माता देशों की लिस्ट में जगह दिलाना।
रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि मैरीटाइम सेक्टर का देश की जीडीपी में योगदान 4% से बढ़ाकर 12% तक किया जाए। इसके लिए डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) और प्राइवेट शिपयार्ड्स को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।





