Saudi Arabia Medical News: सऊदी अरब ने दुनिया में पहली बार रोबोट से किया लिवर ऑपरेशन, डोनर को अब कम दर्द और जल्दी मिलेगी छुट्टी.
सऊदी अरब के किंग फैसल स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (KFSHRC) ने मेडिकल क्षेत्र में दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया है. अस्पताल ने रोबोट का इस्तेमाल करके पहली बार ऐसी लिवर सर्जरी की है जिससे अंगों का दान करने वाले डोनर को अब बहुत कम तकलीफ होगी. इस नई तकनीक से डोनर की रिकवरी पहले के मुकाबले काफी तेज हो गई है और सर्जरी का असर भी शरीर पर कम पड़ता है.
रोबोटिक सर्जरी से डोनर और मरीजों को क्या फायदे मिल रहे हैं?
किंग फैसल अस्पताल ने सिंगल-पोर्ट रोबोटिक तकनीक का सफल इस्तेमाल करके यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस आधुनिक तकनीक की वजह से सर्जरी के दौरान शरीर पर लगने वाले कट बहुत छोटे होते हैं, जिससे डोनर को होने वाला दर्द काफी कम हो गया है. अस्पताल के एक्सपर्ट्स का कहना है कि रोबोट की सटीकता की वजह से डोनर बहुत जल्दी ठीक हो रहे हैं और उन्हें अस्पताल से जल्दी छुट्टी भी मिल रही है. अस्पताल में अब तक 100 से ज्यादा रोबोटिक लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी को अंजाम दिया जा चुका है, जो सुरक्षा के लिहाज से बहुत बड़ी बात है.
सऊदी अरब की इस नई उपलब्धि से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां
- जनवरी 2026: अस्पताल ने दुनिया का पहला पूरी तरह रोबोटिक लिविंग-डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया था, जिसमें डोनर और मरीज दोनों के लिए रोबोट का इस्तेमाल हुआ.
- मई 2025: रियाद में एक 8 साल के बच्चे का सफल रोबोटिक लिवर ट्रांसप्लांट हुआ, जिससे उसकी रिकवरी का समय एक महीने से घटकर मात्र दो हफ्ते रह गया.
- दिसंबर 2024: जेद्दा में 23 साल के युवक का पहला रोबोटिक लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया.
- प्रोफेसर डाइटर ब्रोअरिंग के मुताबिक, यह तकनीक बच्चों के लिए भी काफी सुरक्षित और सटीक काम करती है.
- यह सारी सफलताएं सऊदी अरब के हेल्थ सेक्टर ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम और विजन 2030 का हिस्सा हैं.
सऊदी में स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव का क्या है असर?
सऊदी अरब अपने विजन 2030 के तहत अस्पतालों को दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीकों से लैस कर रहा है. प्रोफेसर डाइटर ब्रोअरिंग ने बताया कि सालों के अनुभव और एडवांस टेक्नोलॉजी के मेल से अब सर्जरी को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बना दिया गया है. इससे न केवल सऊदी के नागरिकों को बल्कि वहां रहने वाले प्रवासियों को भी भविष्य में बेहतर इलाज की उम्मीद मिली है. यह तकनीक अंगों का दान करने वाले लोगों की सुरक्षा को पूरी तरह से सुनिश्चित करती है, जिससे अंग दान करने को लेकर लोगों में भरोसा बढ़ेगा.



