सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हाल ही में मदीना का दौरा किया और वहां मस्जिद-ए-नबवी में नमाज़ अदा की। इस आध्यात्मिक यात्रा के साथ ही सऊदी सरकार ने देश में रहने वाले लाखों प्रवासियों और घरेलू कामगारों के लिए बड़े बदलाव लागू किए हैं। नए नियमों के मुताबिक अब कामगारों से वीज़ा या इकामा का पैसा वसूलना भारी अपराध माना जाएगा और सैलरी देने के तरीके को भी पूरी तरह बदल दिया गया है ताकि किसी का पैसा न मारा जाए।

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क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान मदीना पहुंचे

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 20 फरवरी 2026, शुक्रवार को मदीना का दौरा किया। उन्होंने मस्जिद-ए-नबवी में जाकर रियाज़ुल जन्नत (Al-Rawdah Al-Sharifah) में नमाज़ पढ़ी और पैगंबर मोहम्मद (स.) को सलाम पेश किया। रमज़ान के शुरूआती दिनों में हुई इस यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात मदीना के बड़े अधिकारियों और हरम के इमाम शेख डॉ. अब्दुल रहमान अल-सुदैस से भी हुई। यह यात्रा धार्मिक और प्रशासनिक दोनों लिहाज़ से काफी अहम मानी जा रही है।

अब कामगारों की सैलरी और वीज़ा पर नया नियम

सऊदी सरकार ने घरेलू कामगारों जैसे ड्राइवर, कुक और हाउसकीपर के लिए कड़े नियम बनाए हैं। अब किसी भी कामगार से वीज़ा, इकामा, वर्क परमिट या भर्ती का कोई भी पैसा नहीं लिया जा सकता है। यह सारा खर्च अब मालिक (कफील) को ही उठाना होगा। अगर कोई मालिक कामगार से पैसे मांगता है, तो उस पर 20,000 रियाल तक का जुर्माना लगेगा और भविष्य में वह किसी को नौकरी पर नहीं रख पाएगा।

इसके अलावा, 1 जनवरी 2026 से सैलरी देने का तरीका भी बदल दिया गया है:

  • अब सैलरी नकद (Cash) नहीं दी जा सकती।
  • सभी भुगतान ‘मुसानिद’ (Musaned) डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बैंक में भेजने होंगे।
  • इससे कामगारों को समय पर पूरा पैसा मिलना सुनिश्चित होगा।

प्रवासियों को मिले नए अधिकार और सुरक्षा

नए सुधारों के तहत प्रवासियों को अब अपना पासपोर्ट और इकामा अपने पास रखने का पूरा अधिकार दे दिया गया है। पहले कई बार मालिक ये दस्तावेज़ जब्त कर लेते थे, जिससे कामगार फंस जाते थे। इसके साथ ही, द्विपक्षीय समझौतों के तहत कई देशों के लोगों के लिए कम से कम सैलरी (Minimum Wage) भी तय कर दी गई है। सरकार ने यह भी ऐलान किया है कि कुछ खास इलाकों में अब प्रवासी अपनी प्रॉपर्टी भी खरीद सकते हैं, जो पहले मुमकिन नहीं था।