Strait of Hormuz को लेकर फ्रांस का बड़ा बयान, राष्ट्रपति मैक्रों बोले- बातचीत से निकलेगा हल, सैन्य हमला समाधान नहीं
फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने Strait of Hormuz को फिर से खोलने के लिए कूटनीतिक रास्तों पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को खोलने के लिए सैन्य कार्रवाई करना सही नहीं होगा और यह एक अवास्तविक कदम है। मैक्रों ने कहा कि फ्रांस इस क्षेत्र में शांति बहाल होने के बाद जहाजों की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा तंत्र में शामिल होने के लिए तैयार है। फिलहाल ब्रिटेन की अगुवाई में 36 देशों की एक बैठक हो रही है ताकि राजनीतिक दबाव के जरिए इस संकट का हल निकाला जा सके।
Strait of Hormuz को लेकर फ्रांस की क्या योजना है?
फ्रांस के राष्ट्रपति ने प्रस्ताव दिया है कि Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए United Nations के ढांचे के तहत एक अंतरराष्ट्रीय प्रयास होना चाहिए। मैक्रों का मानना है कि नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे कि ऊर्जा और पानी की सुविधाओं पर हमलों को तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि फ्रांस अभी किसी भी सैन्य हमले का हिस्सा नहीं बनेगा, लेकिन स्थिति सामान्य होने पर जहाजों को एस्कॉर्ट करने में मदद करेगा। फ्रांस का मानना है कि इस मामले में चीन को भी अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए और बातचीत में और अधिक सीधे तौर पर शामिल होना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
इस संकट को सुलझाने के लिए दुनिया भर के कई देश और संगठन सक्रिय हो गए हैं और अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रहे हैं:
- UK की पहल: ब्रिटेन की विदेश सचिव Yvette Cooper की अध्यक्षता में 36 देशों की एक वर्चुअल बैठक बुलाई गई है ताकि समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
- US का रुख: राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अगर Strait of Hormuz बिना किसी बाधा के खुलता है, तो अमेरिका ईरान के साथ युद्धविराम पर विचार कर सकता है।
- NATO की भूमिका: फ्रांस की रक्षा राज्य मंत्री Alice Rufo ने स्पष्ट किया कि NATO का काम यूरोप और अटलांटिक की सुरक्षा करना है और वह इस क्षेत्र में किसी भी हमले का हिस्सा नहीं बनेगा।
- UN सुरक्षा परिषद: बहरीन ने सुरक्षा परिषद में एक नया प्रस्ताव पेश किया है, हालांकि इस पर चीन और रूस जैसे देशों की अपनी राय है।




