पश्चिम एशिया संकट का विमानों पर असर: खाड़ी देशों का टिकट होगा महंगा, एयरलाइंस पर बढ़ा बीमा का भारी बोझ
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष की वजह से विमान कंपनियों के लिए वार-रिस्क इंश्योरेंस की लागत काफी बढ़ गई है। इसकी वजह से भारत से खाड़ी देशों के बीच चलने वाली फ्लाइट्स के किराए में बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना है। इंडिगो जैसी कंपनियों ने ईंधन पर लगने वाले सरचार्ज में बदलाव करना भी शुरू कर दिया है क्योंकि ऑपरेशनल खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।
यात्रियों की जेब पर कितना असर पड़ेगा?
विमानन क्षेत्र से जुड़े जानकारों के मुताबिक, युद्ध के खतरे को देखते हुए बीमा कंपनियों ने प्रीमियम में भारी इजाफा किया है। इसका सीधा असर फ्लाइट के टिकटों पर दिखने वाला है। इंडिगो ने 2 अप्रैल 2026 से ही अपनी नई बुकिंग पर फ्यूल सरचार्ज को संशोधित कर दिया है।
- नैरौ-बॉडी विमान: एक राउंड ट्रिप के लिए करीब 30 से 40 लाख रुपये का अतिरिक्त बीमा खर्च बढ़ गया है।
- वाइड-बॉडी विमान: बड़े जहाजों के लिए यह खर्च 90 लाख से 1 करोड़ रुपये प्रति ट्रिप तक पहुंच गया है।
- प्रति यात्री बोझ: खाड़ी देशों की उड़ानों में प्रति यात्री 20,000 से 35,000 रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
पायलटों की सुरक्षा और नए नियम क्या हैं?
पायलट एसोसिएशन (ALPA) ने सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से मांग की है कि जब तक सुरक्षा का पुख्ता आकलन न हो जाए, तब तक खतरनाक इलाकों में उड़ानें निलंबित रखी जाएं। पायलटों ने अपनी सुरक्षा और बीमा कवर के पुख्ता प्रमाणों की भी मांग की है।
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
|---|---|
| जोखिम वाले क्षेत्र | ईरान, यमन, सीरिया, इराक और अफगानिस्तान के एयरस्पेस से बचने की सलाह दी गई है। |
| पायलटों की मांग | सभी क्रू मेंबर्स के लिए वार-रिस्क इंश्योरेंस कवर अनिवार्य रूप से लागू हो। |
| नया निर्देश | विमान कंपनियों को खुद के स्तर पर सुरक्षा जोखिम का आकलन करने को कहा गया है। |
अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस और भविष्य की स्थिति
बीमा की बढ़ती कीमतों की वजह से कई एयरलाइंस ने अपने रूट बदल दिए हैं। जहां एमिरेट्स जैसी बड़ी कंपनियों को कुछ राहत मिली है, वहीं अन्य अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को मिडिल ईस्ट में हर लैंडिंग के लिए 70,000 से 1,50,000 डॉलर तक का भारी प्रीमियम देना पड़ रहा है।
बीमा कंपनियों ने हवाई जहाजों की कवरेज के लिए अब सख्त शर्तें लागू कर दी हैं। इसमें उड़ान के समय की पूर्व मंजूरी और कुछ क्षेत्रों में विमानों को रात में न रोकने जैसे नियम शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि बीमा खर्च में हुई यह बढ़ोतरी एक स्थाई बदलाव बन सकती है, जिससे खाड़ी देशों की यात्रा करने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए सफर करना अब पहले जैसा सस्ता नहीं रहेगा।




