Iran vs US: ट्रंप ने दिया बड़ा संकेत, ईरान में जमीनी फौज भेजने से नहीं किया इंकार, परमाणु ठिकानों पर है नजर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शनिवार, 7 मार्च को एक बड़ा बयान दिया है। एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे ईरान में जमीनी फौज यानी Ground Troops भेजने की संभावना से इंकार नहीं करते। यह बयान तब आया है जब हाल ही में कुवैत में हुए एक हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की जान गई थी। ट्रंप ने साफ किया कि अगर जरूरत पड़ी तो परमाणु हथियारों के जखीरे को सुरक्षित करने के लिए सेना भेजी जा सकती है।
क्या अमेरिका सच में सेना भेजेगा?
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह किसी भी विकल्प को खारिज नहीं कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने NBC News को दिए इंटरव्यू में यह भी कहा कि पूरी तरह से जमीनी हमला करना समय की बर्बादी हो सकती है। उनका मानना है कि अमेरिकी हवाई हमलों ने पहले ही ईरानी सेना को काफी नुकसान पहुंचाया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी Karoline Leavitt ने भी साफ किया कि अभी जमीनी हमले का कोई पक्का प्लान नहीं है, लेकिन राष्ट्रपति हमेशा सभी रास्ते खुले रखते हैं।
ईरान ने दी अमेरिका को चेतावनी
इस बयान के बाद ईरान की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी फौज जमीन पर उतरती है, तो इसके परिणाम बहुत भयानक होंगे। उन्होंने कहा कि “हम उनका इंतजार कर रहे हैं।” वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिका की आत्मसमर्पण की मांग को ठुकरा दिया है और इसे सिर्फ एक सपना बताया है।
इजरायल और अमेरिका का अगला कदम क्या है?
अमेरिका और इजरायल मिलकर ‘Operation Epic Fury’ चला रहे हैं। इसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता और मिसाइल सिस्टम को खत्म करना है। 1 मार्च को कुवैत में ईरानी ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने के बाद ट्रंप ने ईरान को “बहुत जोर से” जवाब देने की कसम खाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवाई हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक ईरान पूरी तरह से हार नहीं मान लेता या वहां की सरकार गिर नहीं जाती।





